वाराणसी | साइबर अपराध के खिलाफ कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए "ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक" के तहत 4 थानों में 6 म्यूल अकाउंट धारकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। साइबर क्राइम सेल और संबंधित थानों की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे खातों का खुलासा हुआ है जिनका इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर और छिपाने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दायरे में आए 5 म्यूल खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर कुल 51 शिकायतें दर्ज थीं। जांच में सामने आया कि इन खातों के माध्यम से करीब 2 करोड़ 42 लाख 89 हजार 752 रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। इनमें से लगभग 2 करोड़ 9 लाख रुपये की धनराशि विभिन्न खातों में होल्ड/फ्रीज कराई गई है।
सबसे बड़ी कार्रवाई भेलूपुर थाना क्षेत्र में हुई, जहां एक खाते से जुड़े मामलों में लगभग 2.19 करोड़ रुपये के फ्रॉड की जानकारी सामने आई। इसके अलावा सिगरा, चेतगंज और चोलापुर थाना क्षेत्रों में भी म्यूल अकाउंट संचालित करने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
साइबर अपराधी ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, डिजिटल अरेस्ट, पार्ट टाइम जॉब, फर्जी कस्टमर केयर और अन्य तरीकों से ठगी गई रकम को सीधे अपने खाते में नहीं मंगाते। इसके बजाय वे दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें "म्यूल अकाउंट" कहा जाता है।
अक्सर कुछ लोग कमीशन, लालच या नौकरी के झांसे में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी अपराधियों को दे देते हैं। यही खाते बाद में साइबर अपराध की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, यूपीआई आईडी, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी न दें। ऐसा करना आपको भी साइबर अपराध के मामले में आरोपी बना सकता है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार/चिह्नित खाताधारकों से जुड़े 32 अन्य बैंक खातों की जांच अभी जारी है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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