या हुसैन, या हुसैन...की सदाओं संग आग पर दौड़ेगा दूल्हे का जुलूस
बनारस में मुहर्रम की नौवीं तारीख यानी गुरुवार की रात सैकड़ों साल पुरानी रवायतों के साथ आग पर दूल्हे का कदीमी जुलूस दौड़ेगा। शहीदाने कर्बला की याद में इस तरह का दुनिया में इकलौता 'दूल्हे का जुलूस' अपनी अलग रवायत और खास पहचान रखता है। दूल्हा कमेटी के सदर परवेज कादिर खान की मानें तो इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम के घोड़े की नाल के साथ 'दूल्हा' नंगे पांव 30 टन से ज्यादा लकड़ियों के लाल अंगारों पर से होकर गुजरता है इस दौरान ‘या हुसैन, या हुसैन’ की सदाएं बुलंद होती है। दूल्हे के वापस इमामबाड़ा पहुंचने के बाद ही ताजियों के जुलूस उठाएं जाते हैं। 72 अलाव व 60 ताजिये को सलामी देकर रात को उठा यह जुलूस सुबह वापस इमामबाड़े लौटता है।
दूल्हा कासिम नाल कमेटी के सदर परवेज कादिर खान बताते हैं कि हजरत कासिम की शादी तय थी लेकिन कर्बला की जंग का ऐलान होने और जंग में उनके शहीद होने के कारण शादी नहीं हुई। क्यों की उन्होंने शादी के बजाय जंग में शहीद होना पसंद किया। इसलिए उनकी याद में ही सैकड़ों साल पुरानी रवायतों को बनारस के लोग निभाते चले आ रहे हैं। हजरत कासिम के घोड़े की नाल को पकड़ने वाले को दूल्हा कहा जाता है और उस पर इमाम हुसैन की सवारी आती है।
इमामबाड़े में रखी है कदीमी "नाल"
शिवाला के जिस इमामबाड़े से दूल्हे का जुलूस उठता है वहां हजरत कासिम के घोड़े की नाल सुरक्षित रखी हुई है। इसे सिर्फ इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवीं मुहर्रम और 10 वीं को ही बाहर निकाला जाता है। इमामबाड़ा की दीवारों पर प्रतीकात्मक रूप से खून के छींटे कर्बला के मंजर की बयां करते हैं।
दूल्हे का जुलूस जुमेरात की रात 10 बजे शिवाला से उठेगा जो भदैनी, अस्सी दुर्गाकुंड, बाराती बेगम के इमामबाड़े, गौरीगंज, भेलूपुर, रेवड़ी तालाब, नई सड़क होते हुए माध्यरात्रि के बाद फातमान पहुंचेगा। 12 किलोमीटर लंबे रास्ते में जगह-जगह लोग जुलूस आने के पहले ही दस-दस मन लकड़ी के अलाव जलाएंगे। इस दौरान पहले दूल्हा अंगारों पर दौड़ता है और फिर सब उसके पीछे-पीछे दौड़ते हैं।
हिन्दूओं ने सौंपी थी मुस्लिमों को "नाल
दूल्हा कासिम नाल कमेटी के पूर्व सेक्रेटरी सलीम शिवालवी बुजुर्गों की सुनी बताते हैं कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके घोड़े की नाल गंगा में स्नान कर रहे पंडित रामफल को मिली थी। नेपाली रियासत के रामफल को वो नाल आकर्षित कर रही थी इसलिए उन्होंने एक लोहे के बक्से में उसे रख दिया। सलीम शिवालवी बताते हैं कि मोहर्रम आने पर उस नाल से या हुसैन, या हुसैन... की सदाओं निकलती। इसे देखते हुए पंडित रामफल ने नाल का इस्लामिक महत्व समझते हुए उसे शिवाला के मुस्लिमों को दे दिया। तब से लगातार मोहर्रम की 9 व 10 तारीख को दूल्हे का जुलूस उठाया जा रहा है।
प्रशासन ने की तैयारियों की समीक्षा
'दूल्हे' को अंगारों पर चलते देखने के लिए दूर-दूर से लोगों के आने के चलते भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा खास इंतजाम रखा जाता हैं। जुलूस से पूर्व ही तैयारियों की समीक्षा बैठक की जाती है ताकि शांति व्यवस्था कायम रहे।
पिछले दिनों पीस कमेटी की बैठक डायमंड होटल परिसर में हुई। बैठक में मोहर्रम पर्व ताजिया जुलूस विश्व विख्यात शिवाला दुल्हे का जुलूस 25 जून 2026 को रात्रि में निकाले जाने के संबंध में विस्तृत चर्चा वार्तालाप महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजर रखते हुए उपस्थित थाना भेलूपुर क्षेत्र से आए सम्मानित जनमानस, ताजियादार, दूल्हा कमेटी के समस्त पदाधिकारी स्वयंसेवक समाज संगठन सोसाइटी परिवार के पदाधिकारी स्वयंसेवक इस महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित रहकर जुलूस को सकुशल संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान पर चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता गौरव कुमार (सहायक पुलिस आयुक्त सर्किल भेलूपुर), संचालन मुख्तार अहमद (प्रदेश प्रवक्ता समाज संगठन सोसाइटी), धन्यवाद दुर्गा सिंह (प्रभारी निरीक्षक थाना भेलूपुर) व स्वागत परवेज कादिर खान ने किया।
रेवड़ी तालाब, मदनपुरा व नवाबगंज से निकला जुलूस
थाना भेलूपुर क्षेत्र में रेवड़ी तालाब के अशफ़ाक नगर में 24 जून 2026 को रात्रि 11:00 बजे परंपरागत रेवड़ी तालाब दूल्हा कमेटी के द्वारा जुलूस भारी भीड़ के साथ निकाला गया जो विभिन्न रास्तों से होते हुए पांडेय हवेली स्थित इमाम चौक परिसर में भोर में वापस सम्पन्न हुआ। ऐसे ही मदनपुरा थाना दशाश्वमेध क्षेत्र में प्रातः काल जुलूस सकुशल संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण जुलूस में गौरव कुमार (सहायक पुलिस आयुक्त सर्किल भेलूपुर ज़ोन काशी पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी) दुर्गा सिंह (प्रभारी निरीक्षक थाना भेलूपुर) संतोष कुमार सिंह (थाना अध्यक्ष थाना दशाश्वमेध) विशाल विक्रम सिंह, शिवम श्रीवास्तव आदि ने महत्वपूर्ण जुलूस में शामिल थे।
समाज संगठन रही मुस्तैद
समाज संगठन सोसाइटी परिवार सर्किल भेलूपुर शाखा चेतगंज शाखा जैतपुरा, शाखा चौक, शाखा दशाश्वमेध, शाखा सिगरा, शाखा लक्सा के समस्त पदाधिकारी इस महत्वपूर्ण जुलूस में उपस्थित रहकर शांति व्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते दिखे। प्रदेश प्रवक्ता समाज संगठन सोसाइटी मुख्तार अहमद द्वारा नवाबगंज से रात्रि 10:00 बजे निकलने वाले दुल्हे के जुलूस का नेतृत्व किया गया। जुलूस नवाबगंज से होकर दुर्गा कुंड स्थित इमामबाड़े में जाकर समाप्त हुआ है।