वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने वाराणसी दौरे दूसरे दिन काशी पुराधिपति श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। पीएम ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिविधान से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक व पूजन करने के बाद आरती उतारकर देशवासियों के कल्याण की कामना की। इसके पूर्व धाम के द्वार पर डमरुओं के निनाद और शंखनाद से पीएम का स्वागत किया गया। बरेका से विश्वनाथ धाम जाते वक्त रास्ते में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह फूल बरसाकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इस दौरान सिक्योरिटी अलर्ट रहा। प्रधानमंत्री बुधवार की सुबह लगभग साढ़े आठ बजे बरेका से काशी विश्वनाथ धाम के लिए रवाना हुए। इस दौरान बरेका गेट, हाकी चौराहा, लहुराबीर, मैदागिन और विश्वनाथ धाम के द्वार पर पीएम का भव्य स्वागत किया गया। पीएम के आगमन को लेकर भाजपाइयों में खासा उत्साह रहा। सुबह से ही कार्यकर्ताओं की भीड़ सड़कों पर उमड़ पड़ी। कार्यकर्ताओं ने पुष्पवर्षा कर पीएम का स्वागत किया। इस दौरान जमकर नारे लगाए। पीएम लगभग 9 बजे विश्वनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने विधिविधान से बाबा का जलाभिषेक और पूजन किया। इसके बाद गंतव्य के लिए रवाना हुए। प्रधानमंत्री दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार की शाम वाराणसी पहुंचे थे। उन्होंने बरेका में नारी वंदन सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान वाराणसी की 6332 करोड़ की 163 परियोजनाओं का लोकार्पण का शिलान्यास किया। वहीं दो नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पीएम ने डेयरी उद्योग से जुड़ी महिलाओं के खाते में 100 करोड़ रुपये से अधिक की बोनस राशि भी ट्रांसफर की।
*पीएम ने हाथ जोड़कर किया अभिवादन*
पीएम मोदी काशी विश्वनाथ धाम परिसर में गाड़ी से उतरे तो डमरूओं के निनाद से उनका स्वागत किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने हाथ जोड़कर बाबा के भक्तों का अभिवादन स्वीकार किया।
*पीएम मोदी ने षोडशोपचार विधि से किया पूजन*
काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भ गृह में पीएम मोदी ने षोडशोपचार विधि से पूजन किया। इस दौरान ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार किया। वहीं मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
त्रिशूल और डमरू दिखाकर पीएम ने किया भक्तों का स्वागत
पंडित ओम प्रकाश मिश्र सहित पांच ब्राह्मणों ने पीएम मोदी को षोडशोपचार पूजा कराई। पीएम मोदी ने दूसरी बार विश्वनाथ मंदिर में त्रिशूल और डमरू दिखाकर बाबा के भक्तों का अभिवादन किया।
*आज ज़ब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधायक डा नीलकंठ तिवारी को पीठ ठोककर आशीर्वाद दिया*