6/25/2026

मुहर्रम की नौवीं तारीख यानी गुरुवार की रात सैकड़ों साल पुरानी रवायतों के साथ आग पर दूल्हे का कदीमी जुलूस दौड़ेगा।


 या हुसैन, या हुसैन...की सदाओं संग आग पर दौड़ेगा दूल्हे का जुलूस

 बनारस में मुहर्रम की नौवीं तारीख यानी गुरुवार की रात सैकड़ों साल पुरानी रवायतों के साथ आग पर दूल्हे का कदीमी जुलूस दौड़ेगा। शहीदाने कर्बला की याद में इस तरह का दुनिया में इकलौता 'दूल्हे का जुलूस' अपनी अलग रवायत और खास पहचान रखता है। दूल्हा कमेटी के सदर परवेज कादिर खान की मानें तो इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम के घोड़े की नाल के साथ 'दूल्हा' नंगे पांव 30 टन से ज्यादा लकड़ियों के लाल अंगारों पर से होकर गुजरता है इस दौरान ‘या हुसैन, या हुसैन’ की सदाएं बुलंद होती है। दूल्हे के वापस इमामबाड़ा पहुंचने के बाद ही ताजियों के जुलूस उठाएं जाते हैं। 72 अलाव व 60 ताजिये को सलामी देकर रात को उठा यह जुलूस सुबह वापस इमामबाड़े लौटता है।

दूल्हा कासिम नाल कमेटी के सदर परवेज कादिर खान बताते हैं कि  हजरत कासिम की शादी तय थी लेकिन कर्बला की जंग का ऐलान होने और जंग में उनके शहीद होने के कारण शादी नहीं हुई। क्यों की उन्होंने शादी के बजाय जंग में शहीद होना पसंद किया। इसलिए उनकी याद में ही सैकड़ों साल पुरानी रवायतों को बनारस के लोग निभाते चले आ रहे हैं। हजरत कासिम के घोड़े की नाल को पकड़ने वाले को दूल्हा कहा जाता है और उस पर इमाम हुसैन की सवारी आती है।

इमामबाड़े में रखी है कदीमी "नाल"
शिवाला के जिस इमामबाड़े से दूल्हे का जुलूस उठता है वहां हजरत कासिम के घोड़े की नाल सुरक्षित रखी हुई है। इसे सिर्फ इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवीं मुहर्रम और 10 वीं को ही बाहर निकाला जाता है। इमामबाड़ा की दीवारों पर प्रतीकात्मक रूप से खून के छींटे कर्बला के मंजर की बयां करते हैं।

दूल्हे का जुलूस जुमेरात की रात 10 बजे शिवाला से उठेगा जो भदैनी, अस्सी दुर्गाकुंड, बाराती बेगम के इमामबाड़े, गौरीगंज, भेलूपुर, रेवड़ी तालाब, नई सड़क होते हुए माध्यरात्रि के बाद फातमान पहुंचेगा। 12 किलोमीटर लंबे रास्ते में जगह-जगह लोग जुलूस आने के पहले ही दस-दस मन लकड़ी के अलाव जलाएंगे। इस दौरान पहले दूल्हा अंगारों पर दौड़ता है और फिर सब उसके पीछे-पीछे दौड़ते हैं।

हिन्दूओं ने सौंपी थी मुस्लिमों को "नाल

दूल्हा कासिम नाल कमेटी के पूर्व सेक्रेटरी सलीम शिवालवी बुजुर्गों की सुनी बताते हैं कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके घोड़े की नाल गंगा में स्नान कर रहे पंडित रामफल को मिली थी। नेपाली रियासत के रामफल को वो नाल आकर्षित कर रही थी इसलिए उन्होंने एक लोहे के बक्से में उसे रख दिया। सलीम शिवालवी बताते हैं कि मोहर्रम आने पर उस नाल से या हुसैन, या हुसैन... की सदाओं निकलती। इसे देखते हुए पंडित रामफल ने नाल का इस्लामिक महत्व समझते हुए उसे शिवाला के मुस्लिमों को दे दिया। तब से लगातार मोहर्रम की 9 व 10 तारीख को दूल्हे का जुलूस उठाया जा रहा है।

प्रशासन ने की तैयारियों की समीक्षा

'दूल्हे' को अंगारों पर चलते देखने के लिए दूर-दूर से लोगों के आने के चलते भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा खास इंतजाम रखा जाता हैं। जुलूस से पूर्व ही तैयारियों की समीक्षा बैठक की जाती है ताकि शांति व्यवस्था कायम रहे।

पिछले दिनों पीस कमेटी की बैठक डायमंड होटल परिसर में हुई। बैठक में मोहर्रम पर्व ताजिया जुलूस विश्व विख्यात शिवाला दुल्हे का जुलूस 25 जून 2026 को रात्रि में निकाले जाने के संबंध में विस्तृत चर्चा वार्तालाप महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजर रखते हुए उपस्थित थाना भेलूपुर क्षेत्र से आए सम्मानित जनमानस, ताजियादार, दूल्हा कमेटी के समस्त पदाधिकारी स्वयंसेवक समाज संगठन सोसाइटी परिवार के पदाधिकारी स्वयंसेवक इस महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित रहकर जुलूस को सकुशल संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान पर चर्चा की।

बैठक की अध्यक्षता गौरव कुमार (सहायक पुलिस आयुक्त सर्किल भेलूपुर), संचालन मुख्तार अहमद (प्रदेश प्रवक्ता समाज संगठन सोसाइटी), धन्यवाद दुर्गा सिंह (प्रभारी निरीक्षक थाना भेलूपुर) व स्वागत परवेज कादिर खान ने किया।

रेवड़ी तालाब, मदनपुरा व नवाबगंज से निकला जुलूस

थाना भेलूपुर क्षेत्र में रेवड़ी तालाब के अशफ़ाक नगर में 24 जून 2026 को रात्रि 11:00 बजे परंपरागत रेवड़ी तालाब दूल्हा कमेटी के द्वारा  जुलूस भारी भीड़ के साथ निकाला गया जो विभिन्न रास्तों से होते हुए पांडेय हवेली स्थित इमाम चौक परिसर में भोर में वापस सम्पन्न हुआ। ऐसे ही मदनपुरा थाना दशाश्वमेध क्षेत्र में प्रातः काल जुलूस सकुशल संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण जुलूस में गौरव कुमार (सहायक पुलिस आयुक्त सर्किल भेलूपुर ज़ोन काशी पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी) दुर्गा सिंह (प्रभारी निरीक्षक थाना भेलूपुर) संतोष कुमार सिंह (थाना अध्यक्ष थाना दशाश्वमेध) विशाल विक्रम सिंह, शिवम श्रीवास्तव आदि ने महत्वपूर्ण जुलूस में शामिल थे।



समाज संगठन रही मुस्तैद 
समाज संगठन सोसाइटी परिवार सर्किल भेलूपुर शाखा चेतगंज शाखा जैतपुरा, शाखा चौक, शाखा दशाश्वमेध, शाखा सिगरा, शाखा लक्सा के समस्त पदाधिकारी इस महत्वपूर्ण जुलूस में उपस्थित रहकर  शांति व्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते दिखे। प्रदेश प्रवक्ता समाज संगठन सोसाइटी मुख्तार अहमद द्वारा नवाबगंज से रात्रि 10:00 बजे निकलने वाले दुल्हे के जुलूस का नेतृत्व किया गया। जुलूस नवाबगंज से होकर दुर्गा कुंड स्थित इमामबाड़े में जाकर समाप्त हुआ है।

6/24/2026

वाराणसी में भू-माफियाओं पर कार्रवाई की मांग, महिला ने पुलिस आयुक्त से लगाई गुहारबाउण्ड्रीवाल पर कब्जे और धमकी देने का आरोप, मुकदमा दर्ज कर कब्जा मुक्त कराने की मांग

वाराणसी। महमूरगंज क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपनी पुस्तैनी जमीन की बाउण्ड्रीवाल पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी से शिकायत की है। महिला जलपा देवी पत्नी स्व. रामजी निवासी रानीपुर, महमूरगंज ने दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनकी संपत्ति पर कब्जे की नीयत से बाउण्ड्रीवाल का ताला तोड़कर वहां कैमरा लगा दिया और चारपहिया वाहन खड़ा कर दिया।
शिकायत के अनुसार, महिला कुछ समय के लिए अपनी बच्ची को लेकर शहर से बाहर गई थीं। वापस आने पर दिनांक 22 जून 2026 को उन्होंने देखा कि विपक्षीगण द्वारा उनकी बाउण्ड्रीवाल पर कब्जा कर लिया गया है। विरोध करने पर गाली-गलौज, धमकी और धक्का देकर भगाने का आरोप लगाया गया है।
पीड़िता ने बताया कि घटना की सूचना महमूरगंज चौकी और थाना भेलूपुर पुलिस को दी गई, लेकिन अभी तक उचित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी लगातार उन्हें और उनके परिवार को धमकी दे रहे हैं, जिससे परिवार भयभीत है।
पीड़िता ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि आरोपितों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच कराई जाए और बाउण्ड्रीवाल को कब्जा मुक्त कराया जाए। मामले में पुलिस की कार्रवाई का इंतजार है।

पता पूछने के बहाने महिला के कान से सोने का टप्स झपटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

वाराणसी। लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र में महिला से पता पूछने के बहाने सोने का टप्स झपटकर फरार हुए दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना 16 जून 2026 को सत्यम नगर कॉलोनी में हुई थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने महिला के घर के बाहर पहुंचकर पता पूछने के बहाने बातचीत की और मौका पाकर उसके कान से सोने का टप्स झपट लिया। इसके बाद दोनों फरार हो गए थे। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो पता चला कि लूटा गया टप्स उन्होंने एक फाइनेंस कंपनी को बेच दिया था। बिक्री से मिले पैसों में से बचे हुए 8 हजार रुपये पुलिस ने बरामद कर लिए।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 8 हजार रुपये नकद, दो मोबाइल फोन और घटना में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल भी बरामद की है।
लालपुर-पांडेयपुर पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

6/22/2026

छठी मोहर्रम को गाजे-बाजे संग निकला दालमंडी से 40 घंटे चलने वाला कदीमी जुलूस*


*सैकड़ों साल कदीमी दुलदुल के जुलूस में शामिल हुए ऊंट पर बैठे मासूम*

वाराणसी (छठवीं मोहर्रम) को विश्व प्रसिद्द तकरीबन 40 घंटे तक चलने वाला चार सौ साल से ज्यादा कदीमी दुलदुल का जुलूस कच्ची सराय (दालमंडी) इमामबाड़े से उठाया गया। इस जुलूस में कई मशहूर बैंड भी मौजूद थे, जो मातमी धुन बजाते हुए चल रहे थे। जुलूस कच्चीसराय से उठकर विभिन्न रास्तों से होते हुए लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान पहुंचा। इसके बाद वापस चौक होता हुआ मुकीमगंज, प्रह्लादघाट, कोयला बाजार, चौहट्टा होते हुए लाट सरैया के लिए रवाना हुआ। वहां से 8 मोहर्रम की सुबह वापस आकर कच्ची सराय के इमामबाड़े में ही समाप्त होगा। यह जुलूस लगातार 6 से 8 मोहर्रम तक चलता रहता है। जुलूस में शामिल ऊंट पर मासूम अजादार सवार थे। दुलदुल की जियारत के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था 

शकील अहमद जादूगर ने कहा कि मोहर्रम का यह जुलूस महज़ जुलूस ही नहीं बल्कि उस दौर का इतिहास भी अपने भीतर समेटे हुए है जब इन्हीं जुलूसों में छुपकर आजादी के दीवाने एक मुहल्ले से दूसरे मोहल्ले पहुंच जाते थे और अंग्रेज अपना हाथ मलते रहते थे। आठ थाना क्षेत्रों में यह जुलूस आज भी तकरीबन चालीस घंटा चक्रमण करता है। 

छठवीं मोहर्रम के इस विश्व प्रसिद जुलूस में मशहूर बैंड का दस्ता मातमी धुन बजाते हुए चल रहा था। जुलूस नयी सड़क, शेख सलीम फाटक, काली महल, पितरकुण्डा, लल्लापुरा होता हुआ दरगाह-ए-फातमान पहुंचा जहां कुछ देर रूकने के बाद पुनः जुलूस चेतगंज, पियरी, कवीरचौरा, नवाब की ड्योढ़ी औसानगंज, दोषीपुरा, दारानगर, सदर इमामबाड़ा, लाट सरैया, पठानी टोला, हनुमान फाटक, चौहट्टा लाल खां, मुकिमगंज, गायघाट, पक्का महाल, चौक और दालमण्डी होते हुए 40 घंटे तक चल कर वापस कच्चीसराय पहुंचकर समाप्त होगा। 

जुलूस में मुख्य रूप से मिर्जा जफर हसन (एडवोकेट), सगीर हसन, हैदर मौलाई, साजिद हुसैन, इमरान जैदी, सैयद आफाक हैदर, रेहान हसन, जरगम हैदर, शारिक हुसैन, कैफी आजमी, हैदर अब्बास, सैयद सकलैन हैदर, शकील अहमद जादूगर आदि शामिल थे। 

*शेख सलीम फाटक में बाल का मातम आज*

सातवीं मोहर्रम पर मंगलवार को बारह बजे दिन में शेख सलीम फाटक स्थित रिजवी हाउस पर महिलाएं बाल का मातम करेगी। मजलिस का आगाज मोहतरमा नुजहत फरमान खिताबत करेगीं। इस दौरान नौहाख्वानी मातम अंजुमन हैदरी निस्वां करेगी।

*बड़ी व छोटी मेहंदी का कदीमी जुलूस*

चौहट्टा लाल खां इलाके से मोहर्रम के सातवें रोज़ छोटी मेहंदी व बड़ी मेहंदी के दो कदीमी जुलूस निकाले जाते है। इसमें बड़ी मेहंदी का जुलूस सदर इमामबाड़ा जाकर देर रात सम्पन्न होता है।

*कल उठेगा अलम व तुर्बत का जुलूस*

अलम व तुर्बत का जुलूस ख्वाजा नब्बू के चाहमामा स्थित इमामबाड़ा से कार्यक्रम संयोजक मुनाजिर हुसैन मंजू के संयोजन में आठवीं मोहर्रम को रात 8:30 बजे उठेगा। जुलूस उठने पर सवारी पढ़ी जाएगी। जुलूस दालमंडी पहुचने पर अंजुमन हैदरी चौक नौहा ख्वानी व मातम शुरू करेगी। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होकर फातमान पहुंचेगा और पुनः वापस अपने कदीमी रास्तों से होते हुए चहमामा स्थित इमामबाडे  मे आकर सम्पन्न होगा। जुलूस में पूरे रास्ते उस्ताद फतेह अली खां व साथी शहनाई पर मातमी धुन पेश करेंगे। 

*अर्दली बाज़ार में 8 वीं मोहर्रम को उठेगा दुलदुल*

वरुणापार के अर्दली बाजार में सैय्यद जियारत हुसैन के तारगली स्थित इमामबारगाह से 8 वीं मोहर्रम को दुलदुल, अंलम, ताबूत रात्रि 10 बजे उठेगा। जुलूस अपने कदीमी (पुराने) रास्ते से होकर उल्फत बीबी हाता स्थित स्व.मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। जुलूस में अंजुमन इमामिया नौहा व मातम करेंगी। यह जानकारी इरशाद हुसैन "शद्दू" ने दी है।

आंसुओं का नज़राना पेश करते निकला पांचवीं मोहर्रम का जुलूस उस्ताद की याद हुई ताज़ा, आज उठेगा 40 घंटे चलने वाला कदीमी जुलूस


वाराणसी  माहे मोहर्रम की पांचवीं तारीखें को अज़ादारी का सिलसिला और तेज़ हो गया है। रविवार को शहर का शिया बहुल क्षेत्र इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों के ग़म में डूबा रहा। हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि जैसे-जैसे दिन गुज़र रहे हैं, अज़ादारों का जोश और मजलिसों व जुलूसों की तादाद बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में पांचवे दिन शहर के विभिन्न ऐतिहासिक और पारंपरिक रास्तों से कई कदीमी जुलूस पूरी अक़ीदत और एहतराम के साथ उठाए गए।

इसमें मुख्य और ऐतिहासिक कदीमी जुलूस गोविंदपुरा स्थित 'वक्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली' से अंजुमन हैदरी के ज़ेरे-इंतज़ाम पूरी अक़ीदत के साथ उठाया गया। जुलूस के पारंपरिक इतिहास के अनुसार, यहां मुजफ्फरपुर के मशहूर मरहूम वज्जन ख़ान के परिवार के सदस्यों (बेटों) ने बेहद पुरदर्द अंदाज़ में पारंपरिक मर्सिया (सवारी) पढी, इसके बाद, कदीमी परंपरा को निभाते हुए भारत रत्न मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान के परिजनों ने शहनाई पर आंसुओं का नज़राना पेश करते हुए दिल को झकझोर देने वाली मातमी धुन बजाई। भारत रत्न उस्ताद मरहूम बिस्मिल्लाह खान जब हयात में थे तो इसी जुलूस में आंसुओं का नज़राना पेश किया करते थे। उनकी शहनाई से निकलने वाली मातमी धुन पर तमाम लोगों की आंखें नम हो जाती थी। उस्ताद तो नहीं है पर उनकी यादें और रवायतों को परिजन जिंदा रखें हुए हैं।
पांचवीं मोहर्रम को दूसरा प्रमुख जुलूस अर्दली बाज़ार स्थित हाजी अबुल हसन के निवास से निकाला गया। यहां कर्बला के सबसे छोटे 6 महीने के मासूम शहीद शहजादे, हज़रत अली असगर का झूले का जुलूस निकाला गया। इस भावुक कर देने वाले जुलूस में अंजुमन इमामिया के नौजवानों और अज़ादारों ने नौहाख़्वानी की और मातम कर मासूम अज़ादार को खिराजे-अक़ीदत पेश किया।
ऐसे ही तीसरा जुलूस रामनगर क्षेत्र से निकाला गया। यह ऐतिहासिक 'मन्नत का जुलूस' है, जिसे महाराजा बनारस द्वारा स्थापित किया गया था। गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश करते हुए इस जुलूस में शिया समुदाय के साथ-साथ अहले-सुन्नत (सुन्नी समुदाय) के हज़रात और अन्य लोग भी पूरी अक़ीदत व श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं और ताज़िया उठाते हैं। 

*6 मोहर्रम को निकलेगा 40 घंटे चलने वाला प्रसिद्ध जुलूस*

हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सोमवार को 6 मोहर्रम पर 40 घंटे का ऐतिहासिक दुलदुल जुलूस (दालमंडी) स्थित इमामबाड़े से निकलेगा। विश्व प्रसिद्ध 40 घंटे तक लगातार चलने वाला दुलदुल का जुलूस पूरी शान-ओ-शौकत और ग़मगीन माहौल में उठेगा। इस जुलूस का इतिहास बेहद पुराना है, जिसमें हाथी, घोड़े, ऊँट और कई नामी बैंड शामिल रहते हैं, जो पूरे रास्ते मातमी धुन बजाते हैं। यह जुलूस कच्ची सराय से उठकर लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान जाएगा। वहां से वापस आकर चौक, मुकीमगंज, प्रह्लादघाट, कोयला बाज़ार और चौहट्टा होते हुए लाट सरैया पहुंचेगा। यह कदीमी जुलूस लगातार दो दिनों तक चलते हुए 8 वीं मोहर्रम (24 जून) की सुबह वापस कच्ची सराय के इमामबाड़े में आकर संपन्न होगा।