6/22/2026

छठी मोहर्रम को गाजे-बाजे संग निकला दालमंडी से 40 घंटे चलने वाला कदीमी जुलूस*


*सैकड़ों साल कदीमी दुलदुल के जुलूस में शामिल हुए ऊंट पर बैठे मासूम*

वाराणसी (छठवीं मोहर्रम) को विश्व प्रसिद्द तकरीबन 40 घंटे तक चलने वाला चार सौ साल से ज्यादा कदीमी दुलदुल का जुलूस कच्ची सराय (दालमंडी) इमामबाड़े से उठाया गया। इस जुलूस में कई मशहूर बैंड भी मौजूद थे, जो मातमी धुन बजाते हुए चल रहे थे। जुलूस कच्चीसराय से उठकर विभिन्न रास्तों से होते हुए लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान पहुंचा। इसके बाद वापस चौक होता हुआ मुकीमगंज, प्रह्लादघाट, कोयला बाजार, चौहट्टा होते हुए लाट सरैया के लिए रवाना हुआ। वहां से 8 मोहर्रम की सुबह वापस आकर कच्ची सराय के इमामबाड़े में ही समाप्त होगा। यह जुलूस लगातार 6 से 8 मोहर्रम तक चलता रहता है। जुलूस में शामिल ऊंट पर मासूम अजादार सवार थे। दुलदुल की जियारत के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था 

शकील अहमद जादूगर ने कहा कि मोहर्रम का यह जुलूस महज़ जुलूस ही नहीं बल्कि उस दौर का इतिहास भी अपने भीतर समेटे हुए है जब इन्हीं जुलूसों में छुपकर आजादी के दीवाने एक मुहल्ले से दूसरे मोहल्ले पहुंच जाते थे और अंग्रेज अपना हाथ मलते रहते थे। आठ थाना क्षेत्रों में यह जुलूस आज भी तकरीबन चालीस घंटा चक्रमण करता है। 

छठवीं मोहर्रम के इस विश्व प्रसिद जुलूस में मशहूर बैंड का दस्ता मातमी धुन बजाते हुए चल रहा था। जुलूस नयी सड़क, शेख सलीम फाटक, काली महल, पितरकुण्डा, लल्लापुरा होता हुआ दरगाह-ए-फातमान पहुंचा जहां कुछ देर रूकने के बाद पुनः जुलूस चेतगंज, पियरी, कवीरचौरा, नवाब की ड्योढ़ी औसानगंज, दोषीपुरा, दारानगर, सदर इमामबाड़ा, लाट सरैया, पठानी टोला, हनुमान फाटक, चौहट्टा लाल खां, मुकिमगंज, गायघाट, पक्का महाल, चौक और दालमण्डी होते हुए 40 घंटे तक चल कर वापस कच्चीसराय पहुंचकर समाप्त होगा। 

जुलूस में मुख्य रूप से मिर्जा जफर हसन (एडवोकेट), सगीर हसन, हैदर मौलाई, साजिद हुसैन, इमरान जैदी, सैयद आफाक हैदर, रेहान हसन, जरगम हैदर, शारिक हुसैन, कैफी आजमी, हैदर अब्बास, सैयद सकलैन हैदर, शकील अहमद जादूगर आदि शामिल थे। 

*शेख सलीम फाटक में बाल का मातम आज*

सातवीं मोहर्रम पर मंगलवार को बारह बजे दिन में शेख सलीम फाटक स्थित रिजवी हाउस पर महिलाएं बाल का मातम करेगी। मजलिस का आगाज मोहतरमा नुजहत फरमान खिताबत करेगीं। इस दौरान नौहाख्वानी मातम अंजुमन हैदरी निस्वां करेगी।

*बड़ी व छोटी मेहंदी का कदीमी जुलूस*

चौहट्टा लाल खां इलाके से मोहर्रम के सातवें रोज़ छोटी मेहंदी व बड़ी मेहंदी के दो कदीमी जुलूस निकाले जाते है। इसमें बड़ी मेहंदी का जुलूस सदर इमामबाड़ा जाकर देर रात सम्पन्न होता है।

*कल उठेगा अलम व तुर्बत का जुलूस*

अलम व तुर्बत का जुलूस ख्वाजा नब्बू के चाहमामा स्थित इमामबाड़ा से कार्यक्रम संयोजक मुनाजिर हुसैन मंजू के संयोजन में आठवीं मोहर्रम को रात 8:30 बजे उठेगा। जुलूस उठने पर सवारी पढ़ी जाएगी। जुलूस दालमंडी पहुचने पर अंजुमन हैदरी चौक नौहा ख्वानी व मातम शुरू करेगी। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होकर फातमान पहुंचेगा और पुनः वापस अपने कदीमी रास्तों से होते हुए चहमामा स्थित इमामबाडे  मे आकर सम्पन्न होगा। जुलूस में पूरे रास्ते उस्ताद फतेह अली खां व साथी शहनाई पर मातमी धुन पेश करेंगे। 

*अर्दली बाज़ार में 8 वीं मोहर्रम को उठेगा दुलदुल*

वरुणापार के अर्दली बाजार में सैय्यद जियारत हुसैन के तारगली स्थित इमामबारगाह से 8 वीं मोहर्रम को दुलदुल, अंलम, ताबूत रात्रि 10 बजे उठेगा। जुलूस अपने कदीमी (पुराने) रास्ते से होकर उल्फत बीबी हाता स्थित स्व.मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। जुलूस में अंजुमन इमामिया नौहा व मातम करेंगी। यह जानकारी इरशाद हुसैन "शद्दू" ने दी है।

आंसुओं का नज़राना पेश करते निकला पांचवीं मोहर्रम का जुलूस उस्ताद की याद हुई ताज़ा, आज उठेगा 40 घंटे चलने वाला कदीमी जुलूस


वाराणसी  माहे मोहर्रम की पांचवीं तारीखें को अज़ादारी का सिलसिला और तेज़ हो गया है। रविवार को शहर का शिया बहुल क्षेत्र इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों के ग़म में डूबा रहा। हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि जैसे-जैसे दिन गुज़र रहे हैं, अज़ादारों का जोश और मजलिसों व जुलूसों की तादाद बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में पांचवे दिन शहर के विभिन्न ऐतिहासिक और पारंपरिक रास्तों से कई कदीमी जुलूस पूरी अक़ीदत और एहतराम के साथ उठाए गए।

इसमें मुख्य और ऐतिहासिक कदीमी जुलूस गोविंदपुरा स्थित 'वक्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली' से अंजुमन हैदरी के ज़ेरे-इंतज़ाम पूरी अक़ीदत के साथ उठाया गया। जुलूस के पारंपरिक इतिहास के अनुसार, यहां मुजफ्फरपुर के मशहूर मरहूम वज्जन ख़ान के परिवार के सदस्यों (बेटों) ने बेहद पुरदर्द अंदाज़ में पारंपरिक मर्सिया (सवारी) पढी, इसके बाद, कदीमी परंपरा को निभाते हुए भारत रत्न मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान के परिजनों ने शहनाई पर आंसुओं का नज़राना पेश करते हुए दिल को झकझोर देने वाली मातमी धुन बजाई। भारत रत्न उस्ताद मरहूम बिस्मिल्लाह खान जब हयात में थे तो इसी जुलूस में आंसुओं का नज़राना पेश किया करते थे। उनकी शहनाई से निकलने वाली मातमी धुन पर तमाम लोगों की आंखें नम हो जाती थी। उस्ताद तो नहीं है पर उनकी यादें और रवायतों को परिजन जिंदा रखें हुए हैं।
पांचवीं मोहर्रम को दूसरा प्रमुख जुलूस अर्दली बाज़ार स्थित हाजी अबुल हसन के निवास से निकाला गया। यहां कर्बला के सबसे छोटे 6 महीने के मासूम शहीद शहजादे, हज़रत अली असगर का झूले का जुलूस निकाला गया। इस भावुक कर देने वाले जुलूस में अंजुमन इमामिया के नौजवानों और अज़ादारों ने नौहाख़्वानी की और मातम कर मासूम अज़ादार को खिराजे-अक़ीदत पेश किया।
ऐसे ही तीसरा जुलूस रामनगर क्षेत्र से निकाला गया। यह ऐतिहासिक 'मन्नत का जुलूस' है, जिसे महाराजा बनारस द्वारा स्थापित किया गया था। गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश करते हुए इस जुलूस में शिया समुदाय के साथ-साथ अहले-सुन्नत (सुन्नी समुदाय) के हज़रात और अन्य लोग भी पूरी अक़ीदत व श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं और ताज़िया उठाते हैं। 

*6 मोहर्रम को निकलेगा 40 घंटे चलने वाला प्रसिद्ध जुलूस*

हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सोमवार को 6 मोहर्रम पर 40 घंटे का ऐतिहासिक दुलदुल जुलूस (दालमंडी) स्थित इमामबाड़े से निकलेगा। विश्व प्रसिद्ध 40 घंटे तक लगातार चलने वाला दुलदुल का जुलूस पूरी शान-ओ-शौकत और ग़मगीन माहौल में उठेगा। इस जुलूस का इतिहास बेहद पुराना है, जिसमें हाथी, घोड़े, ऊँट और कई नामी बैंड शामिल रहते हैं, जो पूरे रास्ते मातमी धुन बजाते हैं। यह जुलूस कच्ची सराय से उठकर लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान जाएगा। वहां से वापस आकर चौक, मुकीमगंज, प्रह्लादघाट, कोयला बाज़ार और चौहट्टा होते हुए लाट सरैया पहुंचेगा। यह कदीमी जुलूस लगातार दो दिनों तक चलते हुए 8 वीं मोहर्रम (24 जून) की सुबह वापस कच्ची सराय के इमामबाड़े में आकर संपन्न होगा।

सिगरा थाना क्षेत्र स्थित विजया नगरम मार्केट में पुलिस ने रविवार देर रात छापेमारी कर अवैध शराब और 20 हजार रुपये मूल्य की अंग्रेजी शराब और बीयर बरामद की गई।


वाराणसी। सिगरा थाना क्षेत्र स्थित विजया नगरम मार्केट में पुलिस ने रविवार देर रात छापेमारी कर अवैध शराब बिक्री के एक मामले का खुलासा किया। इस कार्रवाई के दौरान पान की एक गुमटी के नीचे छिपाकर रखी गई लगभग 20 हजार रुपये मूल्य की अंग्रेजी शराब और बीयर बरामद की गई।

पुलिस ने मौके से एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार, विजया नगरम मार्केट में अवैध शराब बिक्री की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी सूचना के आधार पर सिगरा पुलिस ने छापा मारा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इसी मार्केट में अवैध शराब बिक्री का भंडाफोड़ किया गया था। इसके अतिरिक्त, रात 10 बजे के बाद चोरी-छिपे शराब बेचने की शिकायत पर मॉडल वाइन शॉप के कर्मचारियों को भी सख्त चेतावनी दी गई थी। सिगरा इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्र ने कहा कि अवैध शराब कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

पुलिस की इस कार्रवाई से स्थानीय निवासियों में हर्ष का माहौल है। उन्होंने पुलिस की तत्परता की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि अवैध शराब बिक्री से न केवल युवा पीढ़ी प्रभावित होती है, बल्कि यह समाज में कई अन्य समस्याओं को भी जन्म देती है।

पुलिस ने बताया कि इस प्रकार की छापेमारी नियमित रूप से की जाएगी ताकि अवैध शराब कारोबार पर अंकुश लगाया जा सके। सिगरा थाना क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की समस्या को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस मामले में गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है ताकि अन्य संभावित आरोपियों का भी पता लगाया जा सके। पुलिस ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे अवैध शराब बिक्री की किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

चौबेपुर थाना क्षेत्र स्थित गंगापुर गांव में गंगा में डूबने से भाई-बहन की मौत हो गई।घटना के बाद परिवार में मातम छा गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

वाराणसी। चौबेपुर थाना क्षेत्र स्थित गंगापुर गांव में गंगा में डूबने से भाई-बहन की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों की पहचान चंदौली जिले के बलुआ थाना क्षेत्र के कांवर गांव निवासी 18 वर्षीय शुभम निषाद और उसकी 10 वर्षीय बहन अनन्या के रूप में हुई है।

शुभम और अनन्या शनिवार को अपनी बुआ विमला देवी के घर गंगापुर गांव घूमने आए थे। उनके पिता नन्दकिशोर निषाद लखनऊ में निजी नौकरी करते हैं। परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। शुभम और अनन्या महड़ौरा स्थित एक निजी विद्यालय में अध्ययनरत थे।

रविवार सुबह दोनों भाई-बहन घर से निकलकर पास स्थित गंगा घाट पर स्नान करने पहुंचे। स्नान के दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में चले गए। आसपास मौजूद लोगों को जब तक घटना की जानकारी होती, तब तक दोनों पानी में डूब चुके थे। सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे तथा तत्काल उनकी तलाश शुरू कर दी।

ग्रामीणों ने साहस का परिचय देते हुए गंगा में उतरकर दोनों की खोजबीन की। काफी प्रयास के बाद शुभम और अनन्या को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों की मौत हो चुकी थी। घटना की खबर फैलते ही गंगा तट पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई।

हादसे की सूचना जैसे ही चंदौली स्थित उनके पैतृक गांव कांवर पहुंची, परिवार में चीख-पुकार मच गई। दोनों के शव गांव लाए गए, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और शुभचिंतक पहुंचे। शव पहुंचते ही पिता नन्दकिशोर निषाद, मां सुनीता देवी, छोटी बहन और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

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चौबेपुर थाना प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार सोनकर ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी, लेकिन परिजन दोनों शवों को अपने गांव लेकर चले गए। इस दुखद घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और संवेदना का माहौल बना हुआ है।

*दालमंडी से निकला 40 से 48 घंटे लगातार चलने छठी मोहर्रम का आलम और दुलदुल का जुलूस गंगा जमुनी तहजीब और ऐतिहासिक अज़ादारी का सबसे बड़ा जुलूस है*


वाराणसी में छठी मोहर्रम का कदीमी जुलूस पूरे शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और ऐतिहासिक अज़ादारी का सबसे बड़ा प्रतीक है। यह जुलूस दालमंडी के कच्ची सराय (मोहल्ला सराय सिताबराय) स्थित वक्फ इमामबाड़े से उठता है, जिसे अंजुमन जव्वादिया (पितरकुंडा) और शहर की अन्य अंजुमनें संभालती हैं।इस ऐतिहासिक जुलूस की मुख्य विशेषताएं और कदीमी रास्ते निम्नलिखित हैं
: जुलूस की अवधि और विशेषता40 घंटे का सफर: यह बनारस का सबसे बड़ा और लंबा चलने वाला जुलूस है, जो करीब 40 से 48 घंटे लगातार चलता है।दशकों पुरानी परंपरा: इसमें पारंपरिक रूप से दुलदुल (इमाम हुसैन की सवारी की शबीह), ऊंट और घोड़े शामिल होते हैं। अकीदतमंद पूरे रास्ते दुलदुल को दूध और मलीदा पिलाकर मन्नतें मांगते हैं।

जुलूस का पारंपरिक मार्ग (कदीमी रास्ते)यह जुलूस दालमंडी (कच्ची सराय) से शुरू होकर शहर के लगभग 75% शिया बहुल इलाकों और 8 थाना क्षेत्रों से होकर गुजरता है:

कच्ची सराय से उठकर नई सड़क, नारियल बाजार, चौक और दालमंडी की गलियों से आगे बढ़ता है।दूसरा चरण: इसके बाद कालीमहाल, माताकुंड, लल्लापुरा और पितरकुंडा होते हुए यह दरगाह फातमान पहुंचता है।तीसरा चरण: दरगाह फातमान से यह चेतगंज, औसानगंज, जैतपुरा, दोषीपुरा, दारानगर, बहेलियाटोला, पठानीटोला और हनुमान फाटक की ओर मुड़ता है।अंतिम चरण: लाट भैरव (लाट सरैया), चौहट्टा लाल खां, मुकीमगंज, गायघाट, ठठेरी बाजार और पत्थर गलिया से गुजरते हुए तीसरे दिन वापस अपने मुख्य इमामबाड़े (कच्ची सराय) लौटकर समाप्त होता है।