5/30/2026

सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणी करने के आरोप में मुकेश सिंह राजपूत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है


वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणी करने के आरोप में मुकेश सिंह राजपूत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि फेसबुक के माध्यम से की गई टिप्पणियों से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

वाराणसी कमिश्नरेट के सिगरा थाने में फेसबुक पर कथित विवादित पोस्ट और टिप्पणियों को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया है। दर्ज एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता रेखा पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि फेसबुक आईडी "rekhapandeyofficial" पर विपक्षी मुकेश सिंह राजपूत द्वारा लगातार अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे उनकी मान-प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
पुलिस अभिलेखों के अनुसार, मामले में सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 67A के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर संख्या 0222 दिनांक 29 मई 2026 को सिगरा थाने में दर्ज की गई।

शिकायतकर्ता का कहना है कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों से उन्हें मानसिक और सामाजिक क्षति हुई है। उन्होंने पुलिस से आरोपित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मामले की जांच का जिम्मा सिगरा थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा को सौंपा गया है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया रिकॉर्ड की जांच के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

वाराणसी की दालमंडी में बकरीद के बाद फिर शुरू हुआ बुलडोजर एक्शन, 18 भवनों को किया जा रहा ध्वस्त

वाराणसी में बकरीद के बाद एक बार फिर दालमंडी में मकानों के ध्वस्तिकरण का कार्य शुरू हो गया है। इस दौरान कुल 18 मकानों को तोड़ा जाएगा, जिनमें तीन पुराने और 15 नए भवन शामिल हैं। बकरीद की छुट्टी की वजह से इस कार्य को फिलहाल रोक दिया गया था, जिसके बाद शनिवार को इसकी कार्रवाई फिर से शुरू की गई है। इस दौरान एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी के नेतृत्व में 200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी शामिल हैं। बता दें कि दालमंडी पूर्वांचल की सबसे बड़ी थोक मंडी है।

*15 नए भवनों पर कार्रवाई*

शनिवार को दालमंडी में एक बार फिर से ध्वस्तिकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस दौरान कई मकानों पर बुलडोजर से कार्रवाई की जा रही है। वहीं, कुछ मकानों पर हथौड़े से करवाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि हथौड़े से तोड़े जाने के बाद मकान के बाकी बचे हिस्सों पर बुलडोजर एक्शन किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी विभाग की माने तो अब तक 60 से अधिक मकान तोड़े गए हैं, जबकि वर्तमान समय में 40 मकान पर ध्वस्तिकरण की कार्रवाई की जा रही है। 630 मीटर की इस सड़क का चौड़ीकरण किया जाना है, जिसके लिए कुल 187 भावनाओं को ध्वस्त करना है।

पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन के के सिंह बताया है कि काफी दिनों से दालमंडी में ध्वस्तिकरण का कार्य रोका गया था, जिसकी एक वजह बकरीद भी थी। त्यौहार और जुम्मे की नमाज की समाप्ति के बाद एक बार फिर से इस कार्रवाई को शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिस दौरान कार्रवाई नहीं की जा रही थी, उस दौरान बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर अपने-अपने मकान की रजिस्ट्री कर रहे थे। सभी को मुआवजा दिए जाने के बाद शनिवार को 15 नए भवनों को तोड़ा जा रहा है।

*पीएम मोदी के 51वें दौरे पर हुआ था शिलान्यास*

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के अपने 51वें दौरे पर इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था। बताया जा रहा है कि यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है और राज्य सरकार की तरफ से इस प्रोजेक्ट के लिए 216 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है। इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 187 भावनाओं को गिराया जाना है, जिनमें 6 धार्मिक स्थल भी शामिल हैं। वहीं, मकान मालिकों को मुआवजा के रूप में 191 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की जाएगी।

श्री काशी विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दालमंडी के रास्ते को चौड़ा किया जा रहा है। 630 मीटर लंबी इस गली को तोड़कर 60 फुट का किया जाना है। इसमें 30 फुट की सड़क होगी, जबकि दोनों तरफ 15-15 फीट के पाथवे बनाए जाएंगे। यहां दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक सुगम रास्ते को लेकर इस प्रोजेक्ट की नीव रखी गई है। अधिकारियों ने बताया है कि जैसे-जैसे भवन स्वामी अपने मकान की रजिस्ट्री कर रहे हैं, वैसे ही उन भावनों को तोड़ा जा रहा है।

वाराणसी में इबोला वायरस को लेकर बाबतपुर एयरपोर्ट अलर्ट पर APHO और एयरपोर्ट डायरेक्टर ने बुलाई हाई-लेवल मीटिंग, कड़े किए गए स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल


 वाराणसी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (बाबतपुर) पूरी तरह से हाई-अलर्ट पर आ गया है। हवाई अड्डे पर इस जानलेवा संक्रमण के किसी भी संभावित खतरे को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा व संवेदीकरण (Sensitization) बैठक आयोजित की गई।यह हाई-लेवल ब्रीफिंग मीटिंग एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (APHO) वाराणसी द्वारा हवाई अड्डा निदेशक (Airport Director) के विशेष समन्वय में आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर संक्रमण के किसी भी संभावित प्रवेश को रोकने के लिए हवाई अड्डे पर की गई तैयारियों को परखना और उन्हें जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करना था।बैठक की संवेदनशीलता को देखते हुए इसमें हवाई अड्डे से जुड़े सभी प्रमुख स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) ने हिस्सा लिया। मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के प्रतिनिधि, इमिग्रेशन (आप्रवासन) विभाग, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी एजेंसियों को आपस में बेहतर समन्वय
(Coordination) स्थापित कर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।बैठक के दौरान एयरपोर्ट पर आने वाले विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग और पैसेंजर स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल की बारीकी से समीक्षा की गई। इसके साथ ही, यदि कोई संदिग्ध यात्री पाया जाता है, तो उसे तुरंत बाकी यात्रियों से अलग करने के लिए बनाए गए 'आइसोलेशन वर्कफ़्लो' (Workflows) और चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया।APHO के अधिकारियों द्वारा एयरलाइंस और CISF के जवानों को विशेष रूप से ब्रीफ किया गया कि विदेशों से आने वाले यात्रियों में इबोला के लक्षणों (जैसे अचानक तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और उल्टी) पर कड़ी नजर रखी जाए। किसी भी संदिग्ध मरीज की पहचान होने पर उसे बिना समय गंवाए तुरंत एयरपोर्ट हेल्थ डेस्क को सौंपने की गाइडलाइन जारी की गई है।हवाई अड्डा प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से आने-जाने वाले यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी सेहत को लेकर पूरी तरह पारदर्शी रहें। यदि यात्रा के दौरान या उससे पहले उनमें किसी भी प्रकार के अस्वस्थ होने के लक्षण दिखते हैं, तो हवाई अड्डे पर मौजूद मेडिकल काउंटर (APHO Desk) को तुरंत और अनिवार्य रूप से सूचित करें

वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज (यूपी कॉलेज) को पहला स्थान मिला है, जबकि पूरे प्रदेश में वाराणसी को 8वां स्थान दिया गया है।


वाराणसी शिक्षा विभाग द्वारा जारी कैंपस संस्कृति के विकास के लिए जरूरी 44 मनको पर आधारित प्रमाण पोर्टल की रैंकिंग शुक्रवार की देर रात जारी कर दी गई है। इस रैंकिंग में वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज (यूपी कॉलेज) को पहला स्थान मिला है, जबकि पूरे प्रदेश में वाराणसी को 8वां स्थान दिया गया है। एकेडमिक, टाइम टेबल, स्कॉलरशिप, सोशल मीडिया इंगेजमेंट, समय से परीक्षा का परिणाम और ग्रीन कैंपस के चलते उदय प्रताप कॉलेज को तीसरी बार ऐसा हुआ है कि प्रथम स्थान दिया गया है।

*प्रदेश में औसत स्कोर 33.59*

उदय प्रताप कॉलेज को प्रथम रैंकिंग मिलने पर महाविद्यालय में जश्न का माहौल है। हालांकि प्लेसमेंट, रिसर्च प्रोजेक्ट, पेटेंट इंडस्ट्री, एकेडमिक्स सहयोग और वर्चुअल लैब जैसे क्षेत्र में यह प्रदेश के कई महाविद्यालयों से पीछे है। उत्तर प्रदेश स्टेट डाटा सेंटर ने शुक्रवार की देर रात यह रैंकिंग जारी की है। रैंकिंग के अनुसार पूरे प्रदेश में औसत स्कोर 33.59 है, जिससे पता चलता है कि अभी भी कई ऐसे महाविद्यालय हैं जो खस्ताहाल में हैं और उन्हें इसमें सुधार करने की आवश्यकता है। पूरे प्रदेश में अगर रैंकिंग की बात करें तो बनारस 8वें स्थान पर है, जबकि लखनऊ, अलीगढ़, मिर्जापुर, मेरठ, चित्रकूट, कानपुर और गोरखपुर बनारस से ऊपर हैं।

*76.33 अंक के साथ टॉप पर यूपी कॉलेज*

बनारस के यूपी कॉलेज को 76.33 अंक मिले हैं, जिससे वह पहले पायदान पर बना हुआ है। गोरखपुर का दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसे 73.40 अंक प्राप्त हुए हैं। जबकि कानपुर का पीपीएन कॉलेज 67.88 अंक के साथ तीसरे स्थान पर है। वहीं, मेरठ का इस्माइल नेशनल महिला पीजी कॉलेज चौथे स्थान पर है और 66.62 अंक मिले हैं। पांचवें स्थान पर अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज को रखा गया है, जिसे 63.16 अंक प्राप्त हुए हैं।

*प्राचार्य ने जताई खुशी*

उदय प्रताप कॉलेज को प्रथम स्थान मिलने पर प्राचार्य प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार सिंह ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा है कि इस उपलब्धि का श्रेय संस्थान के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को जाता है। उन्होंने बताया है कि महाविद्यालय परिसर में जो भी कमियां हैं, उन्हें जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाएगा और उम्मीद है कि अगली रैंकिंग में इसमें सुधार होगा। प्रोफेसर सिंह ने बताया कि महाविद्यालय प्लेसमेंट के क्षेत्र में भी नए-नए काम कर रहा है।

यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को बहुत बड़ी राहत, अब जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगा पाएंगी विद्युत कंपनियां


उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत (Electricity Consumers Relief) मिली है। यूपी में अब बिजली कंपनियां जबरन स्मार्ट मीटर (Smart Meter) नहीं लगा पाएंगी। इस संबंध में स्पष्ट आदेश आ गया है। सरकारी आदेश में कहा गया है कि पोस्टपेड या प्रीपेड विद्युत मीटर के चयन का अधिकार बिजली उपभोक्ताओं के पास रहेगा।

*अपनी मर्जी से स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकेंगी कंपनियां*

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी कर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पोस्टपेड या प्रीपेड विद्युत मीटर लगाने का अधिकार केवल उपभोक्ताओं का होगा। बिजली कंपनियां अपनी मर्जी से जबरन कोई भी स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकेंगी। यह स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने 16 अप्रैल 2026 को लोक महत्व की याचिका दायर कर नए कनेक्शन और पुराने मीटर बदलने के मामलों में स्पष्ट नीति बनाने की मांग की थी। आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की पीठ ने सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।

आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सहित सभी बिजली कंपनियों (डिस्कॉम) के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिया है कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता स्वेच्छा से पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर का विकल्प चुन सकें। इस आदेश से लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

पहले कई क्षेत्रों में बिजली कंपनियां जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा रही थीं, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक परेशानी और तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। स्मार्ट मीटर ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और चोरी रोकने में उपयोगी हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की सुविधा और पसंद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

*उपभोक्ताओं के साथ न्याय हुआ*

विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के आदेश का स्वागत किया है। वधेश कुमार वर्मा ने कहा- नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं के साथ न्याय किया है। अब कोई भी कंपनी उपभोक्ता की इच्छा के विरुद्ध मीटर नहीं थोप सकेगी।

यह फैसला बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है। उम्मीद है कि इस आदेश से अन्य राज्यों में भी उपभोक्ता-अनुकूल नीतियां बनेंगी। बिजली कंपनियों को अब उपभोक्ताओं की लिखित सहमति के बाद ही मीटर लगाए जाएंगे। इस फैसले से पारदर्शिता बढ़ेगी और बिजली वितरण व्यवस्था में उपभोक्ता विश्वास मजबूत होगा।