6/08/2026

आंखों से अधिक पानी क्यों आता है?

अधिकांश लोग सोचते हैं कि आंखों से पानी आना मतलब आंखें बहुत ज्यादा आंसू बना रही हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसका एक प्रमुख कारण ड्राई आई डिजीज (Dry Eye Disease) भी हो सकता है।

जब आंखें सूखी या उत्तेजित हो जाती हैं, तो उनकी सुरक्षा के लिए रिफ्लेक्स टियर्स (Reflex Tears) बनने लगते हैं। हालांकि ये आंसू पर्याप्त चिकनाई नहीं दे पाते, जिससे लगातार पानी आने की समस्या बनी रह सकती है।

आंखों से पानी आने के अन्य सामान्य कारण:

✔ एलर्जी (Allergies)
✔ आंसू की नलियों में रुकावट (Blocked Tear Ducts)
✔ पलकों की असामान्यताएं (Eyelid Abnormalities)
✔ आंखों में संक्रमण या सूजन (Eye Infections & Inflammation)
✔ हवा, धूल और लंबे समय तक स्क्रीन का उपयोग

🔍 एपिफोरा (Epiphora) स्वयं कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है। सही उपचार के लिए इसके वास्तविक कारण की पहचान करना आवश्यक है।

स्वस्थ आंसू केवल मात्रा पर नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता पर भी निर्भर करते हैं।

भीषण गर्मी को देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी गौशालाओं में टीन शेड की समुचित व्यवस्था, गौवंश संरक्षण में लापरवाही पर सख्त हुए डीएम, सभी गौशालाओं के लिए जारी किए कड़े निर्देश.

वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने जिले की गौशालाओं की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि गौवंश संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों एवं पशु चिकित्साधिकारियों से गौशालाओं में चारा, भूसा, पेयजल, टीन शेड, सीसीटीवी कैमरे, बीमार पशुओं के उपचार तथा मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली।

बैठक में निर्देश दिए गए कि गौवंश को केवल सूखा भूसा न खिलाया जाए, बल्कि हरा चारा, चोकर और खली मिलाकर संतुलित आहार उपलब्ध कराया जाए। यदि कहीं केवल सूखा भूसा दिए जाने की शिकायत मिली तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भीषण गर्मी को देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी गौशालाओं में टीन शेड की समुचित व्यवस्था, शेड के ऊपर पुआल बिछाकर नियमित पानी का छिड़काव तथा पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही बीमार पशुओं के समय पर इलाज, मृत पशुओं के विधिवत निस्तारण, सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता और क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करने को कहा।

इसके अलावा गौशालाओं में छाया की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।

स्वस्थ जीवन की नीव स्वच्छ और पौष्टिक आहार पर टिकी होती है।‘ईट राइट’ का हिस्सा बनेंगे काशी के मंदिर और एयरपोर्ट, FSSAI देगा सर्टिफिकेट, जानें क्या होगा फायदा


Eat Right Campaign in Varanasi : स्वस्थ जीवन की नीव स्वच्छ और पौष्टिक आहार पर टिकी होती है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) वाराणसी में 'ईट राइट' अभियान का दायरा बढ़ा रहा है। करीब 2 साल पहले वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन को 'ईट राइट स्टेशन' का सर्टिफिकेट प्रदान किया गया था, जिसके बाद अब धीरे-धीरे धार्मिक और महत्वपूर्ण संस्थान इसका हिस्सा बनने जा रहे हैं। इसका उद्देश्य है कि काशी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित, स्वच्छ और और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो सके।

*अंतिम दौर में है सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया*

जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा के मुताबिक, लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (वाराणसी एयरपोर्ट) मार्कण्डेय महादेव मंदिर, महावीर, मंदिर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित ट्रॉमा सेंटर समेत कई संस्थाओं को 'ईट राइट' प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। यही नहीं, वाराणसी परिक्षेत्र में स्थित पांच नए विद्यालयों में भी 'ईट राइट स्कूल' कार्यक्रम के तहत सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। उन्होंने बताया कि इन स्कूलों में प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही उन्हें आधिकारिक रूप से प्रमाण पत्र सौंप दिए जाएंगे। बता दें कि इससे पहले काशी के 10 विद्यालयों को यह प्रमाण पत्र मिल चुका है।

*29 प्रतिष्ठानों को मिल चुका है सर्टिफिकेट*

जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि 'ईट राइट' योजना के अंतर्गत जिले के अब तक 29 प्रतिष्ठानों को प्रमाण पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इसी साल ट्रॉमा सेंटर, अक्षय पात्र, तरुण चाइल्ड संस्थान, काशी के दो अस्पतालों, एयरपोर्ट और सेंट्रल जेल को भी इस अभियान से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि काशी धर्म नगरी कहीं जाती है और यहां प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन पूजन करने पहुंचते हैं, ऐसे में धार्मिक स्थलों पर भी इस अभियान को बढ़ाया जाएगा।

शहर के मार्कण्डेय महादेव मंदिर, महावीर मंदिर और इस्कॉन मंदिर में भगवान को लगने वाले भोग की प्रमाणन की प्रक्रिया चल रही है। इससे पहले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित विश्वनाथ मंदिर, कीनाराम मठ, संकट मोचन मंदिर और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का सफलतापूर्वक प्रमाण हो चुका है। विशेषज्ञों की माने तो आधुनिक जीवन शैली में खानपान एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और शुद्ध और पौष्टिक भोजन कर पाना एक चुनौती बन चुका है। ऐसे में ईट राइट अभियान कहीं ना कहीं लोगों को सुरक्षित भोजन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

*क्या है अभियान*

बता दें कि 'ईट राइट' कैंपेन के तहत होटल, रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फूड की नियमित जांच की जाती है। उसके साथ ही जिला खाद्य विभाग कारोबारियों को प्रशिक्षण देकर स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार करने के लिए जागरूक करता है। वहीं, 'ईट राइट स्कूल' कार्यक्रम के तहत बच्चों को खाद्य सुरक्षा, पोषण और स्वच्छता की जानकारी दी जाती है, जिससे वह स्वयं के साथ-साथ समाज में भी स्वस्थ खान-पान की संस्कृति को आगे बढ़ा सकें।

*ईट राइट का प्रमाण पत्र*

 भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण जारी करता है। ईट राइट कैंपस के प्रमाण पत्र के लिए सबसे पहले संस्था की वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण करना होगा। इसके साथ ही सभी संबंधित दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। एफएसएसएआई विभाग द्वारा इसका ऑडिट किया जाता है, जिसके बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसी तरह ईट राइट स्कूल के लिए भी रजिस्ट्रेशन, स्कूल में हेल्थ और वैलनेस की गतिविधियां और मूल्यांकन के बाद सर्टिफिकेट जारी होता है। वहीं ईट राइट स्टेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, जिसके बाद रेलवे कैटरर्स को ट्रेनिंग दी जाती है और एफएसएसएआई की पैनल में शामिल ऑडिटिंग एजेंसी स्टेशन का निरीक्षण करती हैं। इस प्रक्रिया के बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है।

गंगा जी में पुरुषोत्तम मास के दौरान भीषण गर्मी के बावजूद आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लगभग41 डिग्री तापमान में भी आस्था का संगम, 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

वाराणसी में पुरुषोत्तम मास के दौरान भीषण गर्मी के बावजूद आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लगभग 41 डिग्री तापमान में दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। प्रमुख देवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं की सुविधा और गर्मी से बचाव के लिए प्रशासन ने विशेष एडवाइजरी भी जारी की है।

पुरुषोत्तम मास में रविवार को काशी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। 41 डिग्री सेल्सियस की तपती धूप के बावजूद मंदिरों और पर्यटन स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। काशी विश्वनाथ मंदिर सहित प्रमुख देवालयों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। एक दिन में काशी में दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मंदिरों में हाजिरी लगाई। 

*काशी विश्वनाथ मंदिर,*

 कालभैरव, अन्नपूर्णा मंदिर, विशालाक्षी, गौरी केदारेश्वर मंदिर और दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पुरुषोत्तम मास और रविवार की छुट्टी के कारण यह भीड़ मंदिरों से लेकर पर्यटन स्थलों तक फैली हुई थी। विश्वनाथ मंदिर में ललिता घाट के रास्ते सीढ़ियों पर भी लोग कतारबद्ध नजर आए। 

कालभैरव मंदिर में श्रद्धालु 200 मीटर तक लंबी लाइन में लगे रहे। अत्यधिक भीड़ होने पर कुछ देर के लिए श्रद्धालुओं को चौखंभा के रास्ते भी दर्शन कराए गए। शाम के समय गंगा आरती के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। नमो घाट भी शाम को पर्यटकों से खचाखच भरा रहा। 

पिछले दिनों विश्वनाथ मंदिर में दर्शन की कतार में खड़े एक श्रद्धालु की गर्मी से तबीयत खराब हो गई थी। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस घटना को देखते हुए चिकित्सकों ने श्रद्धालुओं से गर्मी में एहतियात बरतने की अपील की है। मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार ने कहा कि सेहत का ध्यान रखते हुए ही मंदिरों में दर्शन-पूजन करें। श्रद्धालुओं को पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी गई है।

*श्रद्धालुओं के लिए सलाह*

शरीर में पानी की कमी न होने दें, प्यास लगने का इंतजार न करें। अपने साथ पानी की बोतल हमेशा रखें।

धूप में पानी में थोड़ा नमक-चीनी या ओआरएस का घोल मिलाकर पिएं। 

दर्शन के लिए जाते समय हल्के रंग के, ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें। इससे शरीर को हवा मिलती रहती है।

सिर को ढकने के लिए गमछा, टोपी या छाते का इस्तेमाल करें। आंखों के बचाव के लिए सनग्लासेस (धूप का चश्मा) पहनें।

दोपहर की धूप से बचें। कोशिश करें कि मंदिरों में दर्शन सुबह जल्दी या शाम को करें। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच की तेज धूप में लाइन में खड़े होने से बचें।

दर्शन के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ सकता है, इसलिए खाली पेट घर से न निकलें। 
गर्मी में बाहर का कटा हुआ फल या खुला हुआ खाना खाने से बचें, इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।
यदि आप बीपी, शुगर या किसी अन्य बीमारी के मरीज हैं, तो अपनी नियमित दवाएं समय पर लें और उन्हें साथ रखना न भूलें।

*लक्षणों को पहचानें*

अगर चक्कर आने, अत्यधिक थकान, घबराहट या बहुत ज्यादा पसीना आने जैसी स्थिति बने तो तुरंत किसी छायादार जगह पर बैठ जाएं। पानी पीएं और जरूरत पड़ने पर नजदीकी मेडिकल कैंप या डॉक्टर से संपर्क करें।

वाराणसी कबीरचौरा अस्पताल बनेगा सुपर स्पेशियलिटी हब!

✅ 315.48 करोड़ की लागत से बनेगा 500 बेड का अस्पताल
✅ 47 बेड का अत्याधुनिक ICU
✅ मरीजों को मिलेंगी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं
✅ डीएम और विधायक ने निर्माण कार्य की समीक्षा की

वाराणसी कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल में 315.48 करोड़ रुपये की लागत से 500 बेड का मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाया जा रहा है। नौ मंजिला भवन में ओपीडी, आईपीडी, 47 बेड का आईसीयू और आधुनिक सुविधाएं होंगी। डॉक्टरों व कर्मचारियों के लिए 15 मंजिला पार्किंग भी बनेगी। निर्माण कार्य की समीक्षा विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने की।

कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल की जगह बन रहे 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में नौ मंजिला बिल्डिंग बनेगी। यहां ओपीडी से लेकर आईपीडी और आईसीयू समेत तमाम सुविधाएं होंगी। इसमें डॉक्टर्स और स्टाफ के लिए अलग 15 मंजिल की पार्किंग बनेगी। वहीं, 47 बेड का आईसीयू होगा। वर्तमान में अस्पताल में आईसीयू की सुविधा नहीं है। इसके कारण मरीजों को बीएचयू जाना पड़ता है। कई बार बीएचयू पहुंचने में देरी के कारण स्थिति गंभीर हो जाती है।

विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने
 जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार संग निरीक्षण कर वहां की तैयारियों की समीक्षा बैठक की। बैठक में विधायक ने निर्माण कार्य को समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने पर जोर दिया गया। इस अस्पताल के निर्माण पर 315.48 करोड़ रुपये की लागत आएगी। चिकित्सालय के पुराने भवन को ध्वस्त कर यह नया अस्पताल बनाया जा रहा है।


विधायक ने निर्माणकारी संस्था और कार्यकारी संस्था को निर्देशित किया कि सुरक्षा मानकों का हर स्तर पर समावेश किया जाए। उन्होंने कार्य की प्रगति की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा। इसका उद्देश्य था कि निर्माण कार्य सुचारू रूप से चले। साथ ही अस्पताल आने वाले मरीजों को चिकित्सा सेवा पहले की तरह मिलती रहे और उन्हें कोई परेशानी न हो। एसएसपीजी के प्रमुख अधीक्षक बृजेश कुमार और निर्माणकारी संस्था की प्रस्तुति पर भी विस्तृत चर्चा हुई। 

कबीरचौरा अस्पताल के नाम से जाने जाने वाले श्री शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय राजकीय चिकित्सालय में यह 500 बेड का मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बन रहा है। इसके तहत अस्पताल के जर्जर भवनों को तोड़कर बेसमेंट और आठ मंजिला मुख्य अस्पताल भवन बनाया जाएगा।