5/20/2026

पूर्वांचल की सबसे बड़ी होलसेल दवा मंडी सप्तसागर देशव्यापी दवा कारोबार ऑनलाइन दवा कारोबार के विरोध में दवा व्यापारियों द्वारा की गई बंदी

वाराणसी में बुधवार को ऑनलाइन दवा कारोबार के विरोध में दवा व्यापारियों द्वारा की गई बंदी का व्यापक असर देखने को मिला। शहर की प्रमुख दवा मंडियों और मेडिकल स्टोरों के बंद रहने से मरीजों और उनके परिजनों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई लोग डॉक्टरों की पर्ची हाथ में लेकर दवाओं की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आए।

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) के आह्वान पर दवा विक्रेता समिति वाराणसी ने भी बंदी का समर्थन किया। सुबह से ही सप्तसागर दवा मंडी, लंका, भोजूबीर, लहुराबीर, कबीरचौरा समेत शहर के कई इलाकों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। अस्पतालों और निजी क्लीनिकों के बाहर दवा न मिलने से मरीजों के तीमारदार परेशान दिखाई दिए। कई लोगों को जरूरी दवाएं लेने के लिए दूर-दराज क्षेत्रों तक जाना पड़ा।
दवा विक्रेता समिति वाराणसी के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि ऑनलाइन दवा कारोबार छोटे और मध्यम स्तर के दवा व्यापारियों के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री में कई बार गलत दवा, एक्सपायरी दवा या बिना उचित परामर्श के दवाएं मरीजों तक पहुंच जाती हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ता है।

उन्होंने बताया कि वाराणसी जिले में लगभग पांच हजार दवा दुकानें संचालित हैं। सप्तसागर दवा मंडी पूर्वांचल की प्रमुख दवा मंडियों में शामिल है, जहां से आसपास के करीब 10 जिलों के दवा कारोबारी प्रतिदिन दवाएं खरीदने आते हैं। बंदी को सफल बनाने के लिए समिति की ओर से पहले ही व्यापारियों के बीच जनसंपर्क अभियान चलाया गया था

दवा व्यापारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर संबंधित विभागों और अधिकारियों को पूर्व में ही सूचना दे दी गई थी। कई चिकित्सा संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

बनारस में इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। पिछले चार-पांच दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों का जनजीवन बेहाल कर दिया ह


वाराणसी इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। पिछले चार-पांच दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों का जनजीवन बेहाल कर दिया है। मंगलवार को Banda का तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। इसके साथ ही बांदा देश का सबसे गर्म शहर और दुनिया का तीसरा सबसे गर्म शहर बन गया।


मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2022 में बांदा का तापमान 49.2°C तक पहुंचा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह गर्मी बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में यह रिकॉर्ड भी टूट सकता है।

बुधवार सुबह से ही प्रदेश के ज्यादातर जिलों में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिला। हवा की रफ्तार और उमस ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के 53 जिलों में हीटवेव यानी लू का अलर्ट जारी किया है।

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक अगले 10 दिनों तक प्रदेश में भीषण गर्मी जारी रहने की संभावना है। अधिकांश जिलों में तापमान 45°C से 49°C के बीच रह सकता है। उन्होंने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है।

अब्दुल्ला अंसारी अपने परिवार और करीबियों के साथ पवित्र हज यात्रा के लिए रवाना हो गए। उनके प्रस्थान के समय बड़ी बाज़ार स्थित उनके निवास स्थान पर उन्हें विदा करने और शुभकामनाएं देने वालों का तांता लग गया


वाराणसी :क्षेत्र के जाने-माने प्रमुख साड़ी व्यवसायी और प्रतिष्ठित समाजसेवी अब्दुल्ला अंसारी आज अपने परिवार और करीबियों के साथ पवित्र हज यात्रा के लिए रवाना हो गए। उनके प्रस्थान के समय बड़ी बाज़ार स्थित उनके निवास स्थान पर उन्हें विदा करने और शुभकामनाएं देने वालों का तांता लग गया। सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए इस मौके पर हिंदू और मुस्लिम समाज के सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे।

*सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल*

अब्दुल्ला अंसारी केवल एक सफल व्यवसायी ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के एक सक्रिय समाजसेवी भी हैं। यही कारण है कि जब वह अपने आवास से लगभग आधा दर्जन से अधिक लोगों के जत्थे के साथ मक्का-मदीना के लिए निकले, तो पूरा इलाका उनके स्वागत और विदाई के लिए उमड़ पड़ा। विदाई समारोह में दोनों समुदायों के लोगों ने उन्हें गले लगाकर, फूलों की माला पहनाकर और दुआओं के साथ विदा किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्दुल्ला भाई का सभी वर्गों के साथ बेहद आत्मीय संबंध रहा है, जो आज इस भीड़ के रूप में साफ दिखाई दे रहा है।

*"यह सफर सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह इंसानियत और शांति का पैगाम है। मैं वहां जाकर देश की तरक्की, अमन-चैन और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ मांगूंगा।" — अब्दुल्ला अंसारी, समाजसेवी*

*15 दिनों का होगा पवित्र सफर*

रवानगी के समय मीडिया से बातचीत करते हुए अब्दुल्ला अंसारी ने अपनी यात्रा का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि वह सड़क मार्ग से लखनऊ के लिए रवाना हुए हैं। लखनऊ अमौसी एयरपोर्ट से कल उनकी मक्का (सऊदी अरब) के लिए डायरेक्ट फ्लाइट है। यह पूरी पवित्र हज यात्रा लगभग 15 दिनों की होगी, जिसके बाद वह वतन वापस लौटेंगे।

*दुआओं के साथ दी गई विदाई*

जत्थे के रवाना होते समय माहौल बेहद भावुक और उत्साहपूर्ण था। लोगों ने अल्लाह से उनकी सुरक्षित यात्रा (सफ़र-ए-महमूद) और हज की कबूलियत की दुआ की। विदाई देने पहुंचे स्थानीय नागरिकों ने कहा कि अब्दुल्ला अंसारी जैसे नेक दिल इंसान का हज पर जाना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उनके साथ जा रहे अन्य तीर्थयात्रियों के चेहरों पर भी इस मुकद्दस सफर को लेकर भारी उत्साह देखा गया।

आपरेशन चक्रव्यूह के तहत लोहता पुलिस व SOG की बड़ी कामयाबी, 15 लाख का 54 किलो गांजा बरामद


वाराणसी लोहता आपरेशन चक्रव्यूह के तहत लोहता पुलिस और एसओजी वाराणसी की संयुक्त टीम ने 54.160 किलोग्राम अवैध गांजा, एक ट्रक व 580 रुपये नगद के साथ अंतर्राज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया है। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत 15 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के निर्देशन में 19 मई 2026 को शाम करीब 4:50 बजे थाना लोहता क्षेत्र के सभईपुर अंडरपास के पास चेकिंग के दौरान हरहुआ की तरफ से आ रहे एक मालवाहक ट्रक को रोका गया। ट्रक चालक वकील बिन्द पुत्र स्व. राधेश्याम बिन्द, निवासी ग्राम रंगपुर, थाना दरियाव, जनपद रोहतास, बिहार, उम्र 29 वर्ष ने पूछताछ में बताया कि वह फल लेने के लिए बिहार से प्रयागराज जा रहा है। सघन तलाशी लेने पर ट्रक के आगे बने डिवाइडर में छिपाकर रखा गया 54.160 किलो अवैध गांजा बरामद हुआ। आरोपी ने बताया कि उसने अन्य राज्य से गांजा खरीदकर अधिक लाभ के लिए स्थानीय बाजारों में बेचने हेतु ट्रक में छिपाया था। आरोपी के पास से 580 रुपये नगद भी बरामद हुए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी वकील बिन्द उड़ीसा राज्य के अढ़ामाली अनुगुर जनपद में भी एनडीपीएस एक्ट के मुकदमे में जेल जा चुका है। अन्य राज्यों के आपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है। थाना लोहता में मु0अ0सं0- 0162/2026 धारा- 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। इसमें शामिल थानाध्यक्ष दिगम्बर उपाध्याय, व0उ0नि0 राज दर्पण तिवारी, उ0नि0 मो0 परवेज, उ0नि0 योगेन्द्र कुमार, उ0नि0 ऋतुराज मिश्रा, उ0नि0 कौशल कुमार सिंह, हे0का0 विकल्प राय, हे0का0 सत्यप्रकाश सिंह, का0 अजीत कुमार व का0 ऋषिकेश राय थाना लोहता कमिश्नरेट वाराणसी तथा एसओजी प्रभारी गौरव कुमार सिंह शामिल रहे।

5/19/2026

तपता बनारस जलता इंसान काशी में 45 डिग्री में बनारस में 50 डिग्री वाला गर्मी का टार्चर

वाराणसी: काशी नगरी इन दिनों सूर्य की प्रचंड किरणों से तप रही है। मौसम विभाग के अनुसार तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, लेकिन बनारसवासियों को लग रहा है जैसे पारा 50 डिग्री को पार कर गया हो। सड़कें तवे की तरह जल रही हैं, हवा में लू का थपेड़ा ऐसा कि सांस लेना मुश्किल हो गया है। दिन ढलने के बाद भी राहत नहीं मिल रही। रातें भी उमस भरी और बेचैन कर देने वाली हो गई हैं।शहर की हरियाली का विनाश ही इस भीषण गर्मी का सबसे बड़ा कारण बन गया है। पुराने बनारस में जहां एक समय घने पेड़ों की छांव गलियों को ठंडक प्रदान करती थी, आज वही गलियां कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो चुकी हैं। 

पर्यावरणविदों का कहना है कि पिछले दो दशकों में शहर से हजारों पेड़ काट दिए गए। सड़क चौड़ीकरण, मॉल, अपार्टमेंट और व्यावसायिक निर्माणों ने हरे-भरे इलाकों को निगल लिया। अब शहर में बचे पेड़ों को गिनने के लिए उंगलियां काफी हैं।“पहले घाटों पर हवा भी ठंडी आती थी। अब तो गंगा किनारे भी धूप से बचने की जगह नहीं मिल रही,”
 
सुबह-शाम घाटों पर ठंडक की उम्मीद में लोग पहुंचते हैं, लेकिन लौटते हुए और भी थके हुए नजर आते हैं।शहर के विभिन्न इलाकों में स्थिति और बदतर है। लंका, रविन्द्रपुरी, कैंट, गोदौलिया,  चौक और लगभग सभी घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कंक्रीट की दीवारें और काली सड़कें दिन भर सूर्य की गर्मी सोखती हैं और रात में उसे छोड़ती हैं। नतीजतन रात का तापमान भी सामान्य से 4-5 डिग्री ज्यादा रह रहा है। 

डॉक्टरों के अनुसार हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और त्वचा संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। बनारस की पारंपरिक वास्तुकला भी इस संकट को बढ़ा रही है। संकरी गलियां, ऊंची-ऊंची इमारतें और हवा के रास्ते बंद होना गर्म हवा को फंसाए रखता है। जहां पहले बांस और खपरैल की छतें प्राकृतिक कूलिंग का काम करती थीं, वहीं आज सीमेंट-कंक्रीट की छतें भट्ठी का रूप ले चुकी हैं।

पिछले कुछ दशकों में शहर का शहरीकरण बिना किसी मास्टर प्लान के हो रहा है। ग्रीन कवर घटने से अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island) प्रभाव पैदा हो गया है। 

प्रशासन की ओर से पेड़ लगाने के दावे किए जाते रहते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। लगाए गए अधिकांश पौधे सूख जाते हैं क्योंकि उनकी देखभाल नहीं होती। 

गर्मी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।  सब्जी-फल विक्रेता दोपहर में दुकानें बंद कर देते हैं। स्कूलों में छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं। बिजली की मांग बढ़ने से ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं आम हो गई हैं।बनारस की यह पीड़ा सिर्फ एक शहर की नहीं है। यह पूरे उत्तर भारत के शहरीकरण मॉडल की विफलता की कहानी है। जहां विकास के नाम पर हरियाली को कुचल दिया जा रहा है। 

अगर यही स्थिति रही तो आने वाले सालों में 45 डिग्री 55 डिग्री जैसा महसूस होने लगेगा।समय अब भी है। अगर प्रशासन, नागरिक समाज और पर्यावरण प्रेमी मिलकर बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने, पुराने पेड़ों को बचाने और शहरी नियोजन में हरित तत्व शामिल करने का संकल्प लें, तो बनारस फिर से ठंडी हवाओं और छांव वाली नगरी बन सकता है। वरना यह कंक्रीट का जंगल न सिर्फ बनारसवासियों को, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी जलाता रहेगा।