6/19/2026

बनारस गंगा में नाविकों की मनमानी पर लगेगी लगाम, गंगा में एक रजिस्ट्रेशन पर होगी एक नाव, संचालन रुट भी होगा तय


वाराणसी में गंगा नदी में चलने वाली नावों के लिए आरटीओ विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। यहां प्रत्येक नाव का एक रजिस्ट्रेशन होगा और एक रजिस्ट्रेशन पर सिर्फ एक ही नाव चल सकेगी। अन्य नावों के लिए दूसरा रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही सभी नावों के लिए आरटीओ की ओर से रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किया जाएगा। उस रजिस्ट्रेशन नंबर पर नाव से संबंधित पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। यही नहीं उन नावों के लिए रूट और किराया भी तय किया जाएगा, जिससे नाविकों द्वारा मनमाना किराया वसूलने पर लगाम लग सकेगी।

*4000 नावों का संचालन*

काशी में गंगा नदी में नाव और बजड़ों के संचालक को लेकर आरटीओ विभाग स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार कर रहा है। इसके जरिए नावों और बजड़ों के पंजीकरण, शुल्क निर्धारण और रूट संचालन के अलावा कई बिंदुओं पर पूरी जानकारी होगी। बता दें कि इस समय गंगा नदी में करीब 4000 नावों का संचालन होता है, जिसमें सबसे अधिक मोटर बोट का संचालन किया जाता है। मोटर बोट के कारण गंगा नदी में प्रदूषण के साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था भी ध्वस्त हो जा रही है, लेकिन अब आरटीओ विभाग ने इन नावों और नाविकों पर लगाम लगाने की तैयारी शुरू कर दिया है।

अब तक नाव और बजड़ों का पंजीकरण नगर निगम में होता था और करीब 1217 छोटी और बड़ी नाव यहां पंजीकृत हैं, लेकिन 2 साल से नगर निगम में पंजीकरण की प्रक्रिया और नवीनीकरण की प्रक्रिया बंद पड़ी है। इसके बाद भीड़ कम करने और यात्रियों को सुरक्षित सफर मुहैया करने के उद्देश्य से व नाविकों के जवाबदेही तय करने को लेकर आरटीओ प्रशासन आगे आया है। आरटीओ की ओर से वाहनों की तरह ही नावों पर नंबर प्लेट लगवाई जाएगी। आरटीओ विभाग नामित इंडियन रजिस्टर आफ शिपिंग की ओर से सर्वेक्षण कर रहा है।

*क्या बोले आरटीओ*

आरटीओ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि विभाग की तरफ से नावों को तीन वर्गों में बांटकर सर्वे कराया जा रहा है। इनमें 24 मीटर से अधिक लंबाई वाली नाव को ए श्रेणी में रखा जाएगा। 10 से 24 मीटर की नावों को बी श्रेणी में और 10 मीटर से कम लंबाई वाली नाव को सी श्रेणी में रखा जाएगा। इसके साथ ही उन नावों पर यात्रियों के बैठने की क्षमता भी तय की जाएगी। इसके साथ ही किराया भी तय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रक्रिया के लिए एसओपी तैयार की जा रही है। इसे शासन को भेज कर मंजूरी ली जाएगी। इसके साथ ही शासन की तरफ से नावों को लेकर जो मानक तय किए जाएंगे, उन्ही के आधार पर पंजीकरण और लाइसेंस की प्रक्रिया निश्चित होगी।

मंडूआडीह थाना क्षेत्र स्थित बनारस रेल कारखाना (बरेका) के परिसर में एक रेल कर्मी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ है।


वाराणसी के मंडूआडीह थाना क्षेत्र स्थित बनारस रेल कारखाना (बरेका) के परिसर में एक रेल कर्मी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ है। बताया जा रहा है कि मृतक झारखंड का रहने वाला था और यहां रेलवे के क्वार्टर में अकेले ही रहता था। इस दौरान शव के आसपास खून बिखरा पड़ा था, जिसके बाद पुलिस हत्या और आत्महत्या की गुत्थी में उलझी हुई है।

*खुला था घर का दरवाजा*

जानकारी के मुताबिक, बनारस रेल कारखाना परिसर के आवास संख्या 597/ सी में संदिग्ध परिस्थितियों में पीटर बसंत होरो (37) का शव बरामद हुआ है। शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि शुक्रवार की सुबह पड़ोसियों ने आवास का मुख्य गेट खुला हुआ पाया। इसके बाद लगातार कई बार आवाज लगाई गई, लेकिन घर के भीतर से किसी भी तरह का कोई रिस्पांस नहीं मिला। संदेह होने के बाद पड़ोसी घर के अंदर दाखिल हुए तो पीटर बसंत पेट के बलिए अचेत अवस्था में मिले। वहीं, कमरे में खून भी बिखरा हुआ था, जिसके बाद पड़ोसियों ने पूरे मामले की जानकारी संबंधित थाने को दी।

वहीं, घटना की जानकारी के बाद मंडूआडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने बताया है कि पीटर बसंत पावर लिफ्ट में चालक के पद पर कार्यरत थे। पड़ोसियों ने बताया है कि वह सरकारी क्वार्टर में अकेले रहते थे, जबकि उनकी पत्नी झारखंड में एक सरकारी स्कूल में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। पड़ोसियों ने बताया कि बीती रात उनसे मुलाकात हुई थी, लेकिन सुबह उनके घर का दरवाजा खुला होने के बाद घर से उनका शव बरामद किया गया है।

*क्या बोली पुलिस*

मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने बताया है कि रेल कर्मी का शव उनके ही सरकारी क्वार्टर से बरामद किया गया है। फिलहाल ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उनकी हत्या हुई है, क्योंकि घर में बहुत सारा खून बिखरा पड़ा था। वहीं, घर का मुख्य दरवाजा भी खुला था। फिलहाल, पूरे मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच की जा रही है। पुलिस ने बताया है कि मृतक के परिजनों को जानकारी दे दी गई है। परिजन झारखंड से वाराणसी पहुंच रहे हैं। वहीं, फॉरेंसिक टीम ने भी मौके पर जाकर सबूत इकट्ठा किए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकता है।

काशी के मंडुवाडीह की चंदा पटेल ने प्रेम, विश्वास और समर्पण की लिखी नई मिसाल सफल लिवर ट्रांसप्लांट के बाद पति-पत्नी दोनों स्वस्थ


वाराणसी। विवाह केवल सात फेरों का बंधन नहीं, बल्कि सुख-दुख में एक-दूसरे का संबल बनने का वचन भी है। इस रिश्ते की सच्ची मिसाल वाराणसी के मंडुवाडीह की चंदा पटेल ने पेश की है। उन्होंने अपने पति और पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य पवन पटेल की जान बचाने के लिए अपना लिवर दान कर यह साबित कर दिया कि प्रेम केवल शब्दों से नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण से जीवंत होता है।
पिछले कई महीनों से पवन पटेल गंभीर रूप से बीमार थे। लगातार बिगड़ती सेहत के बाद चिकित्सकीय जांच में पता चला कि उनका लिवर लगभग काम करना बंद कर चुका है। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी जान बचाने का एकमात्र रास्ता तत्काल लिवर ट्रांसप्लांट है। यह खबर पूरे परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी।
ऐसे कठिन समय में चंदा पटेल ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना लिवर दान करने का निर्णय लिया। उनके इस साहसिक फैसले ने परिवार को नई उम्मीद दी। दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में दोनों की विस्तृत चिकित्सकीय जांच की गई। सभी आवश्यक परीक्षण सफल रहने के बाद लिवर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की गई, जो सफल रही।
ऑपरेशन के बाद अब पवन पटेल और चंदा पटेल दोनों स्वस्थ हैं और तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। चिकित्सकों ने भी इस सफल प्रत्यारोपण को संतोषजनक बताया है।
चंदा पटेल के इस त्याग और साहस की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। स्थानीय लोग इसे केवल एक चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण का जीवंत उदाहरण मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि आज के दौर में, जब रिश्तों की मजबूती पर अक्सर सवाल उठते हैं, ऐसे प्रेरक उदाहरण समाज को यह संदेश देते हैं कि सच्चा साथ वही है, जो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ता।
चंदा पटेल का यह निर्णय न केवल अपने पति को नया जीवन देने का माध्यम बना, बल्कि समाज के लिए भी अंगदान के महत्व और मानवीय संवेदनाओं का प्रेरक संदेश बन गया। उनका यह साहसिक कदम लंबे समय तक प्रेम, विश्वास और त्याग की एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।

ये बाबा का यूपी है: अपराधियों को घुसकर मारता है , क्रिमिनल्स पर ‘बाबा’ की पुलिस का ‘वज्रपात’


 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस अपराधियों पर वज्रपात कर रही है। पुलिस न केवल क्रिमिनल्स के फिजिकल नेटवर्क को ध्वस्त कर रही है, बल्कि उनके बढ़ते डिजिटल फुटप्रिंट को भी नुकसान पहुंचा रही है। वाराणसी रेंज पुलिस ने इसके लिए “ऑपरेशन वज्रपात” शुरू किया है। जौनपुर, गाजीपुर और चंदौली में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक 554 ऐसे सोशल मीडिया प्रोफाइल हटाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर क्राइम को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और डर फैलाने के लिए किया गया था।

*सोशल मीडिया पर नजर*

सीएम के निर्देश पर DIG वाराणसी रेंज वैभव कृष्ण ने ऑपरेशन वज्रपात को इस तरह डिजाइन किया है कि पूरे क्रिमिनल इकोसिस्टम को टारगेट किया जा सके। इसके तहत अपराधियों को हर स्तर पर मात दी जा रही है। पुलिस डिजिटल सर्विलांस पर खास ध्यान दे रही है।

जो 554 सोशल मीडिया प्रोफाइल हटाए गए हैं, उनमें गाजीपुर से 250, जौनपुर से 192 और चंदौली से 112 थे। इन प्रोफाइल के जरिए अपराधी डर फैलाने का काम कर रहे थे। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले क्रिमिनल अक्सर ऐसे वीडियो या पोस्ट डालते हैं, जो दूसरों में खौफ पैदा करते हैं। अब पुलिस ऐसे प्रोफाइल पर बारीकी से नजर रख रही है और तुरंत एक्शन भी ले रही है।

*समझाइश और कार्रवाई*

अपने पहले फेज में, पुलिस ने एक बड़ा इंटेलिजेंस सर्वे किया है, जिसमें 165 गिरोह के 1,080 अपराधियों की पहचान की गई है। डिटेल्ड डोजियर तैयार किए गए, जिसमें अपराधियों की क्रिमिनल हिस्ट्री और डिजिटल एक्टिविटी की मैपिंग की गई है। साथ ही कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है। पुलिस अपराधियों को सुधरने का मौका भी दे रही है। जहां छोटे अपराधियों की काउंसलिंग की जा रही है, वहीं आदतन और गंभीर अपराधियों पर FIR हुई हैं। इसके अल्वा, उनके खिलाफ गुंडा कंट्रोल एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई भी की जा रही है।

*ये नया यूपी है*

पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से कमाई गई संपत्ति की पहचान करके उन पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि अधिकारी उन मामलों में खुद से कार्रवाई करें जहां पीड़ित डर के कारण शिकायत दर्ज कराने में हिचकिचाते हैं।

सीएम योगी कई बार यह साफ कर चुके हैं कि उनके राज में अपराधियों को संरक्षण नहीं बल्कि गोली मिलेगी। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि 2017 के बाद का नया उत्तर प्रदेश अपराध को स्वीकार नहीं करता। अपराध करने वालों को हर हाल में उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

चेतगंज पुलिस का एक्शन: नाबालिग को भगाने वाला आरोपी गिरफ्तार, 6 दिन बाद सकुशल बरामद हुई किशोरी


वाराणसी। थाना चेतगंज पुलिस ने नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर घर से भगा ले जाने के मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के साथ अपहृत 15 वर्षीय किशोरी को भी सकुशल बरामद कर लिया। जानकारी के अनुसार 12 जून 2026 को पीड़िता के पिता ने थाना चेतगंज में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा लिया गया है। इस संबंध में मुकदमा संख्या 145/2026, धारा 137(2) एवं 87 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पुलिस आयुक्त के निर्देश पर चलाए जा रहे अपराधियों के विरुद्ध अभियान के तहत प्रभारी निरीक्षक विजय कुमार शुक्ला के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 18 जून को मुखबिर की सूचना पर चित्रकूट रामलीला समिति मैदान के पास चिंताहरण हनुमान मंदिर के निकट से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान *सागर विश्वकर्मा (19 वर्ष)* पुत्र विजय विश्वकर्मा निवासी औरंगाबाद, थाना लक्सा, वाराणसी के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से नाबालिग पीड़िता को भी बरामद कर लिया।

पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि बरामद किशोरी को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर परिजनों को सौंपने की कार्रवाई की गई।

*गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम*

• प्रभारी निरीक्षक विजय कुमार शुक्ला, थाना चेतगंज

• उपनिरीक्षक विकास कुमार मिश्रा, चौकी प्रभारी पानदरीबा

• कांस्टेबल प्रदीप कुमार

• महिला कांस्टेबल सारिका सिंह।