5/03/2026

नमो घाट पर बिछड़ा मासूम, पर्यटक पुलिस ने मिलाया परिजनों से


वाराणसी के नमो घाट पर गश्त के दौरान उप निरीक्षक अंकित कुलश्रेष्ठ, हे0का0 जोगेंद्र कुमार व का0 द्विजेश त्रिपाठी की टीम को एक मासूम बच्चा अकेले रोता हुआ मिला। बच्चा काफी डरा-सहमा था और कुछ बता नहीं पा रहा था। पुलिस टीम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसे शांत कराया और साथ लेकर पूरे घाट क्षेत्र में खोजबीन शुरू की।

काफी प्रयास के बाद पुलिस टीम बच्चे के परिजनों तक पहुंचने में सफल रही, जो उसे ढूंढते-ढूंढते परेशान हो चुके थे। परिजनों ने बताया कि वे बिहार से वाराणसी घूमने आए थे और भीड़ में बच्चा बिछड़ गया था। बच्चे को सुरक्षित पाकर परिवार ने नमो घाट पर्यटक पुलिस का आभार जताया।

UP STF और झारखंड पुलिस का बड़ा धमाका, बैंक डकैती के 'इंटरस्टेट' गिरोह का पर्दाफाश; करोड़ों का सोना बरामद


वाराणसी। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की फील्ड इकाई वाराणसी और झारखंड पुलिस ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए अंतर्राज्यीय बैंक डकैती गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना सहित तीन कुख्यात डकैतों को वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। इनके पास से झारखंड में हुई सनसनीखेज बैंक डकैती का करीब 1 किलो सोना और 20 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।  

*प्रमुख अधिकारियों के नेतृत्व में हुई कार्रवाई*

इस बड़ी घटना के अनावरण और अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था। इस ऑपरेशन का सफल नेतृत्व निम्नलिखित अधिकारियों द्वारा किया गया:  
• निरीक्षक अमित श्रीवास्तव, एसटीएफ फील्ड इकाई वाराणसी।  
• निरीक्षक अनिल कुमार सिंह, एसटीएफ फील्ड इकाई वाराणसी।  

*वाराणसी के सारनाथ से हुई गिरफ्तारी*

एसटीएफ फील्ड इकाई वाराणसी को सूचना मिली थी कि झारखंड के हजारीबाग में हुई बैंक डकैती के अपराधी वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र में छिपे हुए हैं। सटीक सूचना के आधार पर 1 मई 2026 को सिंहपुर (थाना सारनाथ) के पास घेराबंदी कर तीन बदमाशों को दबोच लिया गया।  
*गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण*
• मो० अफजल (सरगना): निवासी नवादा, बिहार।  
• पंकज सिंह उर्फ रौनक सिंह: निवासी गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।  
• सौरभ यादव उर्फ सोनू: निवासी मऊ, उत्तर प्रदेश।  
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*हजारीबाग डकैती का पूरा मामला*

बीते 24 अप्रैल 2026 को हजारीबाग (झारखंड) के बरही स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में दिन-दहाड़े फिल्मी अंदाज में डकैती डाली गई थी। बदमाशों ने बैंक कर्मियों को असलहे के बल पर बंधक बनाया और लगभग 4 किलोग्राम सोना और नकदी लूटकर फरार हो गए थे। घटना के बाद हजारीबाग के बरही थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच करते हुए झारखंड पुलिस ने यूपी एसटीएफ से मदद मांगी, जिसके बाद वाराणसी इकाई ने इस गिरोह को ट्रैक करना शुरू किया।  

*बरामदगी का विवरण*

गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से पुलिस ने लूट का माल बरामद किया है, जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है:
• सोना: 912.22 ग्राम शुद्ध स्वर्ण आभूषण।  
• नकद: 20 लाख रुपये कैश।  
• मोबाइल: 6 मोबाइल फोन।  
• वाहन: घटना में प्रयुक्त स्कॉर्पियो गाड़ी (नंबर- BR-01HN-2024)।  
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*देशभर में फैला था लूट का नेटवर्क (क्रिमिनल हिस्ट्री)*

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका एक मजबूत संगठित गिरोह है, जो केवल बड़ी लूट की वारदातों को अंजाम देता है। इनके द्वारा कबूल की गई प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:  
• पश्चिम बंगाल (2013): दुर्गापुर में मुथुट फाइनेंस से 36 किलोग्राम सोना लूटा था।  
• कोलकाता (2015): IIFL फाइनेंस कंपनी से 14 किलोग्राम सोना लूटा।  
• कोलकाता (2021): मण्णापुरम गोल्ड फाइनेंस से 26 किलोग्राम सोना लूटा, हालांकि चेकिंग के डर से माल छोड़कर भाग गए थे।  
• बिहार (2022): पटना के गर्दनी बाग में IIFL शाखा से 8 किलोग्राम सोना लूटा था।  
• अन्य घटनाएं: रुड़की (उत्तराखंड) और गया (बिहार) में भी डकैती की वारदातों को अंजाम दिया।  
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*मोडस ऑपरेंडी: सोने पर रहती थी नजर*

एसटीएफ के अनुसार, यह गिरोह बैंक के नकद से ज्यादा लॉकर में रखे सोने के आभूषणों पर ध्यान केंद्रित करता था। वारदात से पहले ये लोग 1-2 महीने तक बैंक की रेकी करते थे। ये ऐसे बैंकों को चुनते थे जहां सुरक्षा कम हो और भागने के रास्ते आसान हों। लूट के सोने को बेचकर यह गिरोह प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट में पैसा इन्वेस्ट करता था।  
फिलहाल, गिरफ्तार अभियुक्तों को वाराणसी के सारनाथ थाने में दाखिल कर दिया गया है और आगे की विधिक कार्यवाही झारखंड पुलिस द्वारा की जा रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है।

पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने शहर के प्रमुख गंगा घाटों का स्टीमर के माध्यम से निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।


वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने शहर के प्रमुख गंगा घाटों का स्टीमर के माध्यम से निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान घाटों पर नाव संचालन, स्नान व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गंगा घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। नाव संचालन नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसके अलावा, निरीक्षण के उपरांत पुलिस आयुक्त ने मण्डुआडीह थाना का भी दौरा किया, जहां उन्होंने आरक्षियों की मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जाएं, जिससे वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन और अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें।

पुलिस कमिश्नर ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिस बल की सुविधाओं का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है।

कमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम बढ़ जाने से उन दुकानदारों को दिक्कत सिलिंडर के ‘झटके’ से बिगड़ा बनारसी स्वाद, शादियों के मेन्यू में हो रही कटौती; परेशानी


वाराणसी:कमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम बढ़ जाने से उन दुकानदारों को दिक्कत होगी, जो खान-पान से जुड़े हुए हैं। बनारस की हर गली-चाैराहे पर नाश्ते की दुकान चलाने वाले अब अपने व्यंजनों का दाम बढ़ाने की सोच रहे हैं।

वाराणसी जिले में कमर्शियल गैस सिलिंडर को लेकर काफी ऊहापोह की स्थिति है। एक दिन पहले सिलिंडर की कीमत 993 रुपये थी जो बढ़कर 3200 रुपये हो गई है। इससे होटल, रेस्टोरेंट समेत कैटरिंग उद्योग संचालकों की चिंता बढ़ गई है।  इनमें मिलने वाले व्यंजनों के दाम 30 फीसदी तक बढ़ सकते हैं।  

जिले में गैस की कीमतों के कारण स्ट्रीट फूड एवं रेस्टोरेंट संचालक डीजल भट्ठी और कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं। नदेसर पर रेस्टोरेंट संचालक डीके मिश्रा ने बताया कि गैस को लेकर जिस प्रकार से पिछले दो महीने से दिक्कत चल रही है, अब खाने के सामानों की कीमतें बढ़ाने की नौबत आ गई है।

फास्ट फूड की दुकान लगाने वाले मुकेश कुशवाहा ने बताया कि पहले वह 7-8 घंटे दुकान लगाते थे, लेकिन अब गैस की किल्लत के कारण मात्र चार घंटे ही दुकान लगा रहे हैं। 

*महंगा होगा नाश्ता*

फूड इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि कई छोटे दुकानदार अब गैस छोड़कर कोयले या लकड़ी के चूल्हों की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे न केवल पर्यावरण पर असर पड़ेगा बल्कि खाने की गुणवत्ता और सेवा की गति भी प्रभावित हो रही है। जो ग्राहक कभी गोदौलिया की प्रसिद्ध कचौड़ी या सारनाथ में नाश्ते का आनंद लेते थे, अब यह अनुभव महंगा होने वाला है।  

*शादियों में कम हुआ मेन्यू*

कैटरर शरद श्रीवास्तव ने बताया कि मई और जून में शादियों के जो भी ऑर्डर मिले हैं, उनके मेन्यू में 30 प्रतिशत तक की कटौती की जा रही है। आयोजकों का स्पष्ट रूप से कहना है कि वह गैस नहीं उपलब्ध करा पाएंगे। 

*एलपीजी से 71 रुपये प्रति किग्रा सस्ती PNG*

जिले में एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बीच पीएनजी विकल्प बन रही है। गेल (सिटी गैस ड्रिस्ट्रीब्यूशन) के चीफ मैनेजर प्रवीण गौतम ने बताया कि कमर्शियल गैसी की कीमत बढ़कर 3200 रुपये प्रति सिलिंडर हो गई है। इसके कारण एलपीजी की प्रति किलोग्राम लागत लगभग 171 रुपये तक पहुंच गई है। जिससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर परिचालन लागत का दबाव बढ़ गया है। 

वाणिज्यिक पीएनजी की लागत लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आती है, जिससे उपभोक्ताओं को एलपीजी की तुलना में लगभग 40% तक की बचत संभव है। वहीं, घरेलू उपयोग के लिए पीएनजी की दर 47.47 रुपये प्रति एससीएम एवं वाणिज्यिक उपयोग के लिए 82.05 रुपये प्रति एससीएम निर्धारित है। 

*PNG वाले रेस्टोरेंट में कम आ रही लागत*

जिन भोजनालयों में पीएनजी (पाइपलाइन नेचुरल गैस) का कनेक्शन है, वहां लागत कम आ रही है क्योंकि पीएनजी की दरें सिलेंडर के मुकाबले स्थिर और सस्ती हैं। वहीं, गोदौलिया की तंग गलियों और सारनाथ के कई हिस्सों में, जहां अभी तक पाइपलाइन नहीं पहुंची है, दुकानदार महंगे कमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर हैं। इससे एक ही शहर में उपभोक्ताओं को अलग-अलग दरों पर भुगतान करना पड़ रहा है।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में लागू की गई नई दर्शन व्यवस्था और नियमों के विरोध में रविवार को वाराणसी की सड़कों पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।


वाराणसी,  श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में लागू की गई नई दर्शन व्यवस्था और नियमों के विरोध में रविवार को वाराणसी की सड़कों पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। महानगर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में मैदागिन से विश्वनाथ धाम तक प्रस्तावित पदयात्रा को प्रशासन ने पुलिस बल के सहयोग से बीच में ही रोक दिया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक भी हुई।

*नेताओं की नजरबंदी और भारी पुलिस बल*

कांग्रेस के इस आंदोलन को विफल करने के लिए प्रशासन ने शनिवार रात से ही सख्ती शुरू कर दी थी। पूर्व जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा और युवा कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष चंचल शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेताओं को उनके घरों पर ही नजरबंद कर दिया गया। इसके बावजूद रविवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मैदागिन स्थित कार्यालय पर जुटे और 'आस्था पर हमला बंद करो' जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया।

*90 दिन के प्रतिबंध और ऐप दर्शन पर आपत्ति*


महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में मंदिर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस की मुख्य आपत्तियां निम्नलिखित हैं:

मंगला आरती: एक बार दर्शन के बाद अगली बुकिंग के लिए 90 दिन की समय सीमा तय करने के नियम को तत्काल वापस लिया जाए।

डिजिटल कंट्रोल: ऐप आधारित दर्शन प्रणाली को समाप्त कर पुरानी सरल और सहज व्यवस्था बहाल की जाए।

स्थानीय श्रद्धालु: काशीवासियों के लिए सुगम दर्शन हेतु निर्धारित प्रवेश द्वार और समय सीमा में विस्तार किया जाए।

भ्रष्टाचार की जांच: मंदिर के चढ़ावे और प्रशासनिक कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

*व्यापारिक मॉडल का विरोध*

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि विश्वनाथ दरबार करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसे किसी प्रशासनिक प्रयोगशाला या व्यापारिक मॉडल में बदलना स्वीकार्य नहीं है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इन मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो महानगर कांग्रेस कमेटी व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी।

*प्रदर्शन में प्रमुख उपस्थिति*

इस विरोध प्रदर्शन में सतनाम सिंह, प्रवीन प्रकाश, सैय्यद हसन, रमजान अली, वकील अंसारी, सुनील श्रीवास्तव, अशलम खां, राजेंद्र गुप्ता, अनुराधा यादव, पूनम विश्वशर्मा सहित सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

काशी विश्वनाथ मंदिर की नई व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, पदयात्रा रोक कई नेता किए गए नजरबंद
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