5/27/2026

इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल अराफात, जहां आंसुओं के साथ मांगी जाती है मगफिरत


अराफात के मैदान पर जहां कबूल होती हैं दुआएं और मिटते हैं गुनाह

धरती पर इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है मक्का और मक्का में ही इस्लाम के 5 स्तंभों में से एक हज को पूरा किया जाता है. हज हर सक्षम मुसलमानों के लिए जीवन का अहम हिस्सा है. इसके लिए कई रस्में पूरी करनी होती है. यह इस्लामी महीने के जुल-हिज्जा के 8वें दिन से 13वें दिन तक मनाया जाने वाला महापर्व है. इसका दूसरा दिन यानी जुल-हिज्जा का 9 वां दिन सबसे महत्वपूर्ण है. इस दिन हाजी मक्का के अराफात पर्वत की यात्रा करते हैं और वहां सबसे बड़ी इबादत करते हैं. सभी हाजी अराफात के मैदान में दोपहर से सूर्यास्त तक अल्लाह से दुआ मांगते हैं और इबादत करते हैं. मीना से अराफात की 20 किलोमीटर की पहाड़ी यात्रा बेहद कठिन है. यह मई की झुलसती गर्मी में होती है. करीब 45 से 50 डिग्री के तापमान पर हाजियों को तपते पत्थर पर नंगे पांव अराफात पहाड़ पर चढ़ना होता है और वहां इबादत करनी होती है. अराफात पर्वत का ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. आइए जानते हैं कि हाजी का अराफात पर्वत पर चढ़ना क्यों जरूरी है.

*अराफात पर्वत पर क्यों चढ़ते हैं हाजी*

अराफात पर्वत मक्का से लगभग 20 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है. ऐसा माना जाता है कि पैगंबर मुहम्मद ने इसी पवित्र पर्वत पर अपना अंतिम भाषण दिया था, जिसे विदाई उपदेश के नाम से जाना जाता है. इस उपदेश में पैगंबर ने मुसलमानों के बीच समानता और एकता का आह्वान किया था. ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति 9 जुल-हिज्जा को अराफात पर्वत पर नहीं पहुंचता, उसका हज अधूरा हो जाता है. पैगंबर मुहम्मद साहब ने स्वयं यहां आने की सख्त हिदायत देते हुए फरमाया था, अल-हज्जू अराफाह यानी अराफात में ठहरना ही हज है. यदि कोई यहां नहीं पहुंचता, तो उसका हज अमान्य हो जाता है. यहां दुनिया भर से आए लाखों मुसलमान एक जैसे सफेद कपड़ों (इहराम) में सिर झुकाकर सिर्फ अल्लाह से रो-रोकर अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं. इसे कयामत का दिन या जजमेंट डे का प्रतीक माना जाता है. यहां की इबादत से गुनाहों से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है. पैगंबर साहब के अनुसार जो व्यक्ति अराफात के दिन सच्चे दिल से दुआ मांगता है, अल्लाह उसके पिछले और अगले एक साल के छोटे गुनाह माफ कर देता है. कहा जाता है कि यहां अल्लाह गुनाहों को तत्काल माफ कर देते हैं. इसे साल का सबसे पवित्र दिन माना जाता है, जब अल्लाह दुनिया के आसमान पर आकर अपने बंदों की हर जायज दुआ कुबूल करता है और उन्हें नरक की अग्नि या जहन्नम से मुक्ति देता है.

*इसके पीछे क्या है धार्मिक इतिहास*

अराफात पर्वत के लेकर कई तरह की ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताएं हैं. पहली मान्यताओं के अनुसार जब अल्लाह ने हजरत आदम और बीबी हव्वा को जन्नत से जमीन पर भेजा तो वे दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए थे. वे कई वर्षों तक दुनिया के अलग-अलग कोनों में भटकते रहे और रो-रोकर अल्लाह से अपनी भूल की माफी मांगते रहे. भटकते हुए आखिरकार इसी अराफात के मैदान में स्थित जबल अल-रहमा यानी रहमत की पहाड़ी पर उन दोनों की मुलाकात हुई. इसी स्थान पर अल्लाह ने उनकी तौबा या क्षमा याचना स्वीकार की थी. चूंकि अराफात शब्द का अरबी में अर्थ होता है एक-दूसरे को पहचानना या जानना, इसलिए इस जगह का नाम अराफात पड़ा. दूसरी मान्यताओं के अनुसार पैगंबर मोहम्मद साहब ने आखिरी खुतबा यानी अंतिम उपदेश अराफात पर्वत पर दी थी. यह ऐतिहासिक तथ्य है कि सन 632 ई में अपने जीवन के आखिरी हज्जतुल विदा के दौरान पैगंबर मोहम्मद साहब ने इसी पहाड़ी पर खड़े होकर दुनिया के सामने अपना आखिरी और ऐतिहासिक उपदेश दिया था. उन्होंने इसी जगह से मानव अधिकारों, महिलाओं के सम्मान, नस्लभेद की समाप्ति और पूरी मानवता को आपसी भाईचारे का संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि किसी भी अरबी को गैर-अरबी पर और किसी गोरे को अश्वेतों पर कोई श्रेष्ठता हासिल नहीं है. श्रेष्ठता का आधार केवल इंसान के अच्छे कर्म यानी तकवा हैं. इन दो कारणों से अराफात पर्वत का बेहद खास महत्व है.


अराफात पर्वत सऊदी अरब के हेजाज़ प्रांत में पवित्र मक्का शहर से लगभग 20 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है. यह एक ग्रेनाइट और ग्रेनोडायोराइट पत्थरों की पहाड़ी है. भौगोलिक रूप से यह एक विशाल और समतल मैदान के बीचों-बीच स्थित है. यह पहाड़ी समुद्र तल से 1,490 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इसके शीर्ष पर एक सफेद रंग की मीनार बनी है, जो दूर से ही इसकी पहचान कराता है.

हज के दौरान यहां जाने वाले हाजियों को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. क्योंकि इस समय बेहद गर्मी रहती है. हज के दिनों में यहां का तापमान अक्सर 40से 45 डिग्री से भी उपर पहुंच जाता है. खुला मैदान होने के कारण सीधी धूप और गर्म हवाएं डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का बड़ा कारण बनती हैं. एक ही दिन में 15 से 20 लाख लोग मक्का और मीना से अराफात के मैदान की ओर बढ़ते हैं. करीब 20 किलोमीटर की यात्रा करनी होती है. भारी जाम और पैदल चलने की लंबी दूरी बुजुर्गों व बीमार लोगों के लिए अत्यधिक थकाऊ होती है.

हज के नियमों के तहत हाजियों के लिए अराफात के पूरे मैदान में कहीं भी ठहरना अनिवार्य है, न कि विशेष रूप से इस छोटी पहाड़ी के ऊपर चढ़ना. पैगंबर साहब ने भी कहा था, मैं यहां ठहरा हूं, लेकिन पूरा अराफात ठहरने की जगह है. चूंकि पहाड़ी का आकार बहुत छोटा है और वहां लाखों लोग एक साथ नहीं समा सकते, इसलिए लोग पहाड़ी के ऊपर रुकने के बजाय नीचे बने विशाल टेंटों में रुकते हैं. पहाड़ी पर चढ़ना केवल एक प्रतीकात्मक ज़ियारत है. धूप और भगदड़ के खतरे के कारण प्रशासन भी लोगों को ऊपर ज्यादा देर रुकने की अनुमति नहीं देता. सभी हाजी सूर्यास्त होते ही इस मैदान को खाली कर मुज़दलिफ़ा के लिए रवाना हो जाते हैं.

मक्का में 5 से 6 दिनों तक हज की रस्मों में हाजी को भाग लेना होता है. यह एक महान धार्मिक सफर है. इसलिए इसे हज यात्रा कहा जाता है. यह जुल-हिज्जा महीने की 8 तारीख से 13 तारीख तक चलता है. इसकी संक्षिप्त टाइमलाइन इस प्रकार है

पहला दिन :- यह दुल-हिज्जा महीने के 8वें दिन होता है. इस दिन मीना की यात्रा की जाती है. हाजी इहराम यानी बिना सिले सफेद लिबास पहनकर हज की नीयत करते हैं. इसके बाद वे मक्का से मीना नामक टेंटों के शहर पहुंचते हैं और वहां दिन-रात की नमाज़ें अदा करते हैं.

दूसरा दिन :- यह जुल-हिज्जा के 9वें दिन होता है. यह बेहद महत्वपूर्ण है. इसे अराफात का दिन कहा जाता है. इस दिन 4 बजे सुबह से ही हाजी मीना से अराफात के मैदान पहुंचते हैं और दोपहर से सूर्यास्त तक अल्लाह से दुआ-इबादत करते हैं. सूर्यास्त के बाद वे मुज़दलिफ़ा आकर खुले आसमान के नीचे रात बिताते हैं और कंकड़ इकट्ठा करते हैं.

तीसरा दिन :- यह जुल-हिज्जा के 10वें दिन होता है. इसे ईद और कुर्बानी का दिन कहा जाता है. इस दिन हाजी सुबह वापस मीना आते हैं और बड़े शैतान को कंकड़ मारते हैं. इसके बाद अल्लाह की राह में जानवर की कुर्बानी दी जाती है. पुरुष बाल मुंडवाते हैं और इहराम खोल देते हैं. फिर वे मक्का जाकर काबा का मुख्य चक्कर लगाते हैं जिसे तवाफ़-ए-ज़ियारत कहा जाता है. इसके बाद सफा-मरवा की दौड़ यानी सई पूरी की जाती है.

चौथा, पांचवां और छठा दिन :- यह जुल-हिज्जा के 11, 12 और 13 वें दिन होता है. इसे तशरीक के दिन कहा जाता है. इस दिन हाजी मीना में ही ठहरते हैं और हर दिन दोपहर के बाद तीनों शैतानों को कंकड़ मारते हैं. अंत में, मक्का छोड़कर अपने घर लौटने से पहले काबा का आखिरी चक्कर लगाते हैं, जिसे तवाफ़-ए-विदा कहा जाता है.

*इस बार भारत से 1 लाख 75 हजार हज यात्री*

इस बार भारत ने 1 लाख 75 हजार श्रद्धालुओं को हज पर भेजा है. जेद्दा में सरकारी अधिकारी इसकी व्यवस्था में लगे हैं. भारत का हज कोटा पिछले साल की तरह ही 1 लाख 75 हज़ार 25 तीर्थयात्रियों पर अपरिवर्तित बना हुआ है. इनमें से 1 लाख 22 हज़ार 518 तीर्थयात्री हज कमेटी ऑफ़ इंडिया के ज़रिए यात्रा कर रहे हैं, जबकि 52 हज़ार 507 तीर्थयात्री निजी टूर ऑपरेटरों के ज़रिए यह यात्रा कर रहे हैं.

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दिनों-दिन बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाएगी। और ब्लाइंड स्पाट भी कैमरे की नजर में होंगे


 वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दिनों-दिन बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाएगी। परिसर की दीवारें जहां भी नीची हैं, उन्हें ऊंचा किया जाएगा। अभी 50 हजार वर्ग मीटर के इस परिसर की दीवारें आठ फीट तक हैं।उनके निचले हिस्से में पत्थर की दीवार है तो ऊपर ग्रिल व नेट लगाई गई हैं, लेकिन भगवान जौ विनायक मंदिर के पास, नीलकंठ व सतुआ बाबा आश्रम गली की ओर से दीवार नीची है। इससे बाहर से अंदर तक देखा या चढ़ कर आया जा सकता है। दीवार बढ़ाकर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की जाएगी।
इसके अलावा धाम से सटी और इस ओर आने वाली गलियों में हाई रिजाल्यूशन के एचडी कैमरे लगाए जाएंगे। परिसर के ब्लाइंड स्पाट भी कैमरे की नजर में होंगे। लगभग एक सप्ताह पिछले दिनों आईबी की अपर निदेशक विनीता शर्मा, एडीजी सुरक्षा तरुण गाबा ने परिसर का निरीक्षण कर वहां की वर्तमान सुरक्षा स्थिति का ऑडिट किया था।
बाद में मंदिर सुरक्षा समिति की बैठक में उन्होंने दीवार की ऊंचाई और कैमरे की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया। अब मंदिर प्रशासन ने कैमरे के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। जहां-कहीं दीवारें नीची हैं उस क्षेत्र का चिह्नांकन किया जा रहा है। अपर निदेशक आइबी एवं एडीजी सुरक्षा की चिंता सावन में होने आयोजन एवं विशेष व्रत त्योहारों पर जुटने वाली अपार भीड़ को लेकर भी है।
इस दृष्टि से सुरक्षा, यातायात, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की वर्तमान स्थिति और भविष्य की जरूरतों पर भी ध्यान दिया गया है। उड़पी व आसपास के दुकानदारों, ग्राहकों के साथ ही गंगा द्वार से दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की सुगम व व्यवस्थित वापसी के लिए गेट नंबर चार के निकट प्रशासनिक भवन के बगल से वैकल्पिक मार्ग का प्रस्ताव भी दिया गया है।
साथ ही भैरव गेट पर भीड़ के प्रभावी नियंत्रण व व्यवस्थित आवागमन के लिए आधुनिक स्लाइडिंग गेट स्थापित किया जाना है। गंगा द्वार व जलमार्ग सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए जल पुलिस, एनडीआरएफ व पीएसी की संयुक्त बोट पेट्रोलिंग को और प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है। साइबर सुरक्षा व सोशल मीडिया मानिटरिंग पर विशेष जोर देने का निर्देश है।
बैरिकेडिंग, होल्डिंग एरिया, वीडियो वाल (विशाल डिस्प्ले सिस्टम) और उद्घोषणा प्रणाली को और प्रभावी बनाने की भी योजना है। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के डिप्टी कलेक्टर शम्भू शरण ने बताया कि समस्त निर्देशों को ध्यान में रखते हुए आकलन किया जा रहा है। जल्द ही मूर्त रूप देने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।

काशी के तीन प्रमुख चौराहों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अजय राय का पुतला दहन कर जमकर नारेबाजी किया


वाराणसी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी के विरोध में आज काशी के भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर भारी रोष जताया।काशी के तीन प्रमुख चौराहों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अजय राय का पुतला दहन कर जमकर नारेबाजी किया भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री व काशी के सांसद के खिलाफ ऐसा बयान अत्यंत निंदनीय है, जिससे जनता और कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से अजय राय पर तत्काल कार्रवाई करने और सार्वजनिक माफी की मांग की। इस प्रदर्शन में पार्षद अनंतराज गुप्ता, पार्षद सुरेश चौरसिया, शुभम चौरसिया, नलिन नयन मिश्रा सहित भारी संख्या में स्थानीय पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के करीब 5 हजार ऐसे छात्र हैं, जिनका अंक अब तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है।


वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के करीब 5 हजार ऐसे छात्र हैं, जिनका अंक अब तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है। इस संबंध में यूनिवर्सिटी प्रशासन में विभिन्न जिलों के 80 कॉलेजों को नोटिस जारी करते हुए 2 दिन में जवाब मांगा है और अंक अपलोड करने को कहा है। बताया जा रहा है कि छात्रों के अंक की हार्ड कॉपी भी अभी यूनिवर्सिटी को नहीं भेजी गई है, जिससे छात्रों का रिजल्ट प्रकाशित करने में देरी हो रही है।

*5 जिलों के कॉलेज ने नहीं भेजे अंक*

जानकारी के मुताबिक, वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) यूनिवर्सिटी ने विभिन्न जिलों के 80 कॉलेजों को नोटिस जारी करते हुए छात्रों के रिजल्ट यूनिवर्सिटी तक जल्द से जल्द पहुंचाने को कहा है। बताया जा रहा है कि वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली में काशी विद्यापीठ से संबंद्ध 80 ऐसे कॉलेज है, जिन्होंने यह लापरवाही बारती है। इन कॉलेजों ने विद्यार्थियों के स्किल डेवलपमेंट, इंटरनल और प्रैक्टिकल जैसे परीक्षाओं के अंक अभी तक पोर्टल पर अपलोड नहीं किए हैं, जिसके बाद करीब 5 हजार छात्रों का रिजल्ट अधर में लटका हुआ है।

*28 जुलाई को होगा दीक्षांत समारोह*

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन कॉलेजों को नोटिस जारी करते हुए 2 दिन का समय दिया है और कहा है कि छात्र-छात्राओं के अंक इन दो दिनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड हो जाने चाहिए। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध कॉलेजों का विषम सेमेस्टर का रिजल्ट अभी तक जारी नहीं हुआ है। वहीं, 28 जुलाई को यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया जाना है। यदि समय से छात्र-छात्राओं के रिजल्ट घोषित नहीं होंगे, तो दीक्षांत समारोह के दौरान मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल देने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

*गोपनीय विभाग को भेजें हार्ड कॉपी*

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कॉलेजों को स्पष्ट रूप से देरी न करने की चेतावनी दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा है कि यदि तय समय पर रिजल्ट जारी नहीं होंगे तो उन कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के भविष्य पर असर पड़ेगा और उन्हें सर्टिफिकेट और मेडल प्रदान करने में मुश्किल होगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र-छात्राओं के अंक पत्र को पोर्टल पर अपलोड करने के साथ ही गोपनीय विभाग को इसकी हार्ड कॉपी भी भेजने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं। वहीं, निर्देश मिलने के बाद संबंधित कॉलेज अंक पत्र को अपलोड करने में जुट गए हैं।

बैंक खातों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो शातिर गिरफ्तार


वाराणसी। पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी की साइबर क्राइम टीम ने आमजन के बैंक खातों से धोखाधड़ी कर अवैध निकासी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, फर्जी कूटरचित आधार कार्ड और नकदी बरामद की गई है।

पुलिस के अनुसार 24 मई 2026 को शिवदत्त हरिजन निवासी बलिया, वर्तमान पता इंजीनियर हाल पुलिस लाइन वाराणसी ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बैंक खाते से अवैध रूप से 12 लाख रुपये की साइबर ठगी कर ली गई। मामले में थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देश पर डीसीपी अपराध के नेतृत्व में एसीपी साइबर अपराध विदुष सक्सेना की निगरानी में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 27 मई को वाराणसी से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान सुरेंद्र कुमार निवासी मोहम्मदाबाद गाजीपुर और विनय कुमार निवासी बलिया के रूप में हुई है।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पहले लोगों के बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों की सिम को चोरी, छल अथवा “सिम अपडेट” के नाम पर स्वैप करा लेता था। इसके बाद आरोपी PayTM, PhonePe, G-Pay और Mobikwik जैसे यूपीआई एप सक्रिय कर लेते थे। फिर फर्जी आधार कार्ड और गलत पहचान पत्रों के जरिए विभिन्न सीएसपी सेंटरों से नकदी निकालकर रकम आपस में बांट लेते थे।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ साइबर अपराध समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। गिरफ्तारी करने वाली टीम में निरीक्षक योगेंद्र प्रसाद, निरीक्षक विजय नारायण मिश्र, उपनिरीक्षक संजीव कन्नौजिया, उपनिरीक्षक आलोक रंजन सिंह सहित साइबर क्राइम थाना की टीम शामिल रही।