वाराणसी: लक्सा थाना क्षेत्र के औरंगाबाद इलाके में 35 वर्षीय ब्यूटिशियन पूनम शर्मा की हत्या का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने मृतका के साथी 50 वर्षीय मनोज शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी को शुक्रवार को हरिश्चंद्र घाट के पास से दबोचा गया। एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपी मनोज शर्मा ने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि पूनम अक्सर दो लोगों से फोन पर लंबी बातचीत करती थी, जिसे लेकर उसे शक था कि उसके किसी और से अवैध संबंध हैं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। पुलिस के अनुसार घटना वाले दिन भी दोनों के बीच इसी मुद्दे पर कहासुनी हुई। आरोपी नशे की हालत में था और गुस्से में उसने पूनम का गला घोंटकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद उसने पूनम का मोबाइल फोन भी कहीं फेंक दिया ताकि पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। जांच में यह भी सामने आया कि पूनम अपने पति किसन प्रसाद और दो बच्चों को छोड़कर वर्ष 2021 से मनोज शर्मा के साथ रह रही थी। करीब एक माह पहले पति की मौत के बाद पूनम अपने बच्चों को अपने साथ रखना चाहती थी, लेकिन मनोज इसका विरोध कर रहा था। आरोपी का कहना था कि बच्चे बड़े हो चुके हैं और वे उसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। पुलिस को आरोपी के भाई सुनील की पत्नी से भी अहम जानकारी मिली। उसने बताया कि पिछले एक महीने से बच्चों को लेकर दोनों के बीच लगातार झगड़े हो रहे थे। मामले के खुलासे में लक्सा थानाध्यक्ष राजू कुमार, औरंगाबाद चौकी प्रभारी प्रमोद कुशवाहा, उपनिरीक्षक सुमित कुमार समेत पुलिस टीम की अहम भूमिका रही। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया है।
5/02/2026
मध्य प्रदेश के जबलपुर हादसे के बाद वाराणसी पुलिस सख्त, नाविकों में मचा हड़कंप वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।
वाराणसी: मध्य प्रदेश के जबलपुर में हाल ही में हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार की शाम गंगा की लहरों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले नाविकों और पर्यटकों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार और जल पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर दो दर्जन से अधिक नावों को सीज कर दिया।
*लाउड हेलर से चेतावनी, फिर ताबड़तोड़ कार्रवाई*
शुक्रवार शाम एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार भारी पुलिस बल के साथ अस्सी घाट पहुंचे। उन्होंने लाउड हेलर के माध्यम से सभी नाविकों को सख्त चेतावनी दी कि क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं और बिना लाइफ जैकेट के नाव का संचालन कतई न करें। चेतावनी के बावजूद जब कुछ नाविक नियमों का उल्लंघन करते पाए गए, तो पुलिस खुद नाव लेकर गंगा में उतरी और कार्रवाई शुरू की।
*गंगा के बीच सेल्फी लेना और बर्थडे मनाना पड़ा भारी*
अभियान के दौरान पुलिस ने देखा कि बीच गंगा में कुछ पर्यटक बिना लाइफ जैकेट पहने सेल्फी ले रहे थे। एसीपी ने करीब 100 मीटर दूर से पीछा कर उस नाव को रुकवाया और सुरक्षा के लिहाज से एक सिपाही को उस पर तैनात कर नाव को किनारे लगवाया। यही नहीं, एक अन्य नाव पर युवक-युवतियां बर्थडे पार्टी मना रहे थे, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर उस नाव को भी तत्काल सीज कर दिया गया।
*दो दर्जन से अधिक नावें सीज*
- एसीपी जल पुलिस अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि गंगा में सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। जबलपुर हादसे के बाद यह विशेष अभियान चलाया गया है। उन्होंने बताया कि:
- बिना लाइफ जैकेट नाव चलाने वालों पर कार्रवाई हुई।
- क्षमता से अधिक पर्यटक बैठाने वाली नावों को पकड़ा गया।
- कुल दो दर्जन से अधिक नावों को सीज कर अस्सी घाट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
*सावधान रहें पर्यटक:* पुलिस ने पर्यटकों से भी अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा के साथ समझौता न करें। नाव पर सवार होते समय लाइफ जैकेट जरूर पहनें और क्षमता से अधिक सवारी वाली नाव पर न बैठें।
भीषण गर्मी वाले मई महीने की शुरुआत फरवरी के मौसम जैसी हुई। पारा सिर्फ 33.8 डिग्री; 10 दिन तक नहीं चलेगी लू
वाराणसी :- भीषण गर्मी वाले मई महीने की शुरुआत फरवरी के मौसम जैसी हुई। बादल और प्रदूषण का स्तर घटने से धूप चमकीली हो गई, फिर भी शुक्रवार को पारा 33.8 डिग्री के पार नहीं जा सका। यह सामान्य से भी 6.6 डिग्री तक नीचे रहा। जबकि पिछले पांच साल में मई की शुरुआत 36 डिग्री से लेकर 44 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ हुई।
काशी का न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.7 डिग्री नीचे 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा। शुक्रवार को बारिश का सिलसिला थमते ही काशी की हवा में करीब 71 अंकों का सुधार आ गया और एक्यूआई 119 से घटकर 48 यानी येलो जोन से ग्रीन जोन में आ गया। मौसम साफ होने से धूप की तीव्रता तो बढ़ी, मगर धरती ठंडी होने के चलते तापमान बहुत ऊपर नहीं जा सका।
यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से चार मई से प्रदेश में आंधी और तूफान के साथ बारिश होने की संभावना बन गई है। इसकी चेतावनी भी जारी कर दी गई है। इसके चलते तापमान में 6 से 8 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। वहीं मई के शुरुआती 10 दिनों तक लू चलने की संभावना न के बराबर है।
*लू सामान्य से ज्यादा दिनों तक चल सकती है*
डॉ. सिंह ने बताया कि मई में प्रदेश के उत्तरी तराई क्षेत्रों में लू के दिनों की संख्या सामान्य से ज्यादा रहने के आसार हैं, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य रहने की संभावना है। मई के दौरान प्रदेश के पूर्वी, मध्यवर्ती, तराई और दक्षिणी भाग में औसत मासिक न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है।
मौसम विज्ञान विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया कि अप्रैल के शुरुआती और अंतिम चरण में तीन सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते चार दिन तक ओलावृष्टि और बारिश हुई। यह बारिश अप्रैल के मासिक औसत से भी ज्यादा रही। काशी में अप्रैल में बारिश का औसत 6.2 मिमी है, जबकि इस बार तीन बार मिलाकर 30 मिमी तक बरसात हो चुकी है।
तमाम जागरूकता अभियान के बाद भी साइबर ठगी की घटनाओं पर क्यो नही लग पा रही है लगाम
जनता के जागरूक ना होने का फायदा उठा रहे है साइबर ठग
आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है, जहाँ इंटरनेट और तकनीक ने जीवन को सुगम बनाया है। लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी की घटनाएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद इन घटनाओं पर नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा? इस समस्या का सबसे बड़ा कारण जनता में जागरूकता की कमी और तकनीकी समझ का अभाव है। इसके अलावा, साइबर अपराधियों की चतुर रणनीतियाँ और बदलते तकनीकी तरीके भी इस समस्या को जटिल बनाते हैं।
साइबर ठगी के विभिन्न रूप, जैसे फिशिंग, ऑनलाइन स्कैम, बैंक धोखाधड़ी, और डेटा चोरी, आम लोगों को आसानी से निशाना बनाते हैं। सरकार, पुलिस, और निजी संस्थाएँ जागरूकता अभियान चला रही हैं, जिनमें सोशल मीडिया, टीवी, रेडियो, और कार्यशालाओं के माध्यम से लोगों को शिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। फिर भी, साइबर ठगी की घटनाएँ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि जागरूकता अभियान अधिकांशतः शहरी और शिक्षित वर्ग तक सीमित रहते हैं, जबकि ग्रामीण और कम पढ़ा-लिखा वर्ग, जो तकनीक के मामले में कम जागरूक है, इन अपराधियों का आसान शिकार बन जाता है।
जनता में जागरूकता की कमी का एक बड़ा कारण तकनीकी जटिलता है। आम लोग पासवर्ड सुरक्षा, सुरक्षित वेबसाइट की पहचान, या फिशिंग ईमेल को समझने में असमर्थ होते हैं। उदाहरण के लिए, एक सामान्य व्यक्ति को यह समझना मुश्किल होता है कि एक लिंक पर क्लिक करने या ओटीपी साझा करने से उसका बैंक खाता खाली हो सकता है। इसके अलावा, साइबर अपराधी मनोवैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करते हैं, जैसे डर, लालच, या तात्कालिकता का माहौल बनाकर लोगों को ठगते हैं। ऐसे में, जागरूकता अभियानों का प्रभाव सीमित हो जाता है, क्योंकि वे लोगों की भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक कमजोरियों को संबोधित नहीं कर पाते।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण है साइबर अपराधियों की तेजी से बदलती रणनीतियाँ। जैसे-जैसे तकनीक विकसित होती है, वैसे-वैसे अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक, और मैलवेयर जैसे उन्नत तकनीक का उपयोग कर वे ठगी को और परिष्कृत बना रहे हैं। जागरूकता अभियान इन तेजी से बदलते तरीकों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते। साथ ही, कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता और साइबर अपराधियों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच के कारण उनकी गिरफ्तारी और सजा में देरी होती है, जिससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है।
इस समस्या से निपटने के लिए जागरूकता अभियानों को और प्रभावी करना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में साइबर सुरक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। साथ ही, बैंकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ग्राहकों को वास्तविक समय में चेतावनी देने और सुरक्षित लेनदेन के लिए सरल उपाय सुझाने चाहिए।
पुलिस और साइबर सेल को और अधिक संसाधन और प्रशिक्षण देकर साइबर अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।अंततः, साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए जागरूकता के साथ-साथ तकनीकी साक्षरता, कानूनी सुधार, और सामाजिक सहभागिता की आवश्यकता है। जब तक जनता स्वयं सतर्क और शिक्षित नहीं होगी, तब तक साइबर अपराधियों के खिलाफ यह लड़ाई अधूरी रहेगी
हमारी जनगणना, हमारा विकास”अब डिजिटल गिनती, घर-घर सर्वे और खुद जानकारी भरने का मौका
Census 2027: “हमारी जनगणना, हमारा विकास” थीम के तहत राजधानी लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में जनगणना निदेशक आईएएस शीतल वर्मा ने वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह जनगणना देश और प्रदेश के विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी और पहली बार इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न कराया जाएगा।
*इतिहास से वर्तमान तक: जनगणना का सफर*
भारत में जनगणना का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1872 में पहली बार जनगणना की प्रक्रिया शुरू की गई थी, हालांकि यह पूरे देश में एक साथ नहीं हुई थी। इसके बाद 1881 में पहली बार देशव्यापी जनगणना का आयोजन किया गया।
आईएएस शीतल वर्मा ने बताया कि वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना भारत की 16वीं जनगणना होगी और आजादी के बाद यह 8वीं जनगणना के रूप में आयोजित की जाएगी। यह प्रक्रिया न केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित होती है, बल्कि देश के सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक ढांचे की विस्तृत जानकारी भी प्रदान करती है।
*दो चरणों में होगी जनगणना*
उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहला चरण (मकानों की सूचीकरण और हाउस लिस्टिंग):
यह चरण 7 मई से 21 मई 2026 तक चलेगा, जिसमें मकानों की पहचान और सूची तैयार की जाएगी।
दूसरा चरण (जनसंख्या गणना):
इसके बाद 22 मई से 20 जून 2026 तक मकानों और परिवारों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। वहीं अंतिम जनसंख्या गणना का चरण फरवरी 2027 में पूरा किया जाएगा।
*पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना*
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न किया जाएगा। डेटा संग्रहण के लिए मोबाइल एप का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनेगी। शीतल वर्मा ने बताया कि यह कदम भारत को डिजिटल प्रशासन की दिशा में और आगे ले जाएगा।
*स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प*
जनगणना 2027 में नागरिकों को पहली बार स्व-गणना का विकल्प भी दिया गया है। इसके तहत लोग 7 मई से 21 मई 2026 के बीच ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं भर सकेंगे। स्व-गणना पूरी करने के बाद नागरिकों को एक विशेष SE ID प्रदान की जाएगी, जिसे प्रगणक को दिखाना होगा। सत्यापन के बाद ही प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी। हालांकि यह सुविधा वैकल्पिक है और हर घर तक प्रगणक पहुंचकर जानकारी एकत्र करेगा।
*33 सवालों के जरिए जुटेगा डेटा*
जनगणना के दौरान कुल 33 सवालों के माध्यम से जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें मकान की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं, परिवार के सदस्य, शिक्षा, रोजगार और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़े प्रश्न शामिल होंगे। यह डेटा सरकार के लिए बेहद उपयोगी होगा, क्योंकि इसके आधार पर योजनाओं की रूपरेखा तैयार की जाती है और संसाधनों का सही वितरण सुनिश्चित किया जाता है।
*गोपनीय रहेगा पूरा डेटा*
जनगणना निदेशक ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यह कार्य जनगणना अधिनियम 1948 के तहत किया जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि इस डेटा का उपयोग किसी भी प्रकार के टैक्स निर्धारण या पुलिस जांच के लिए नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल विकास योजनाओं को प्रभावी बनाना है।
*5.25 लाख कर्मियों की होगी तैनाती*
इस विशाल अभियान को सफल बनाने के लिए उत्तर प्रदेश में लगभग 5.25 लाख कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें 5 लाख से अधिक प्रगणक और पर्यवेक्षक शामिल होंगे। इनकी तैनाती मंडल, जिला और तहसील स्तर पर की जाएगी। राज्य के सभी 75 जिलों में यह अभियान चलाया जाएगा, जिसमें 783 नगरीय निकाय और करीब 1.04 लाख गांव शामिल होंगे।
*350 तहसीलों और 3.9 लाख ब्लॉकों में सर्वे*
जनगणना का कार्य प्रदेश की 350 तहसीलों और लगभग 3.9 लाख ब्लॉकों में किया जाएगा। प्रत्येक क्षेत्र में घर-घर जाकर डेटा एकत्र किया जाएगा, जिससे कोई भी व्यक्ति छूट न सके।
*टोल फ्री नंबर से मिलेगी सहायता*
जनगणना से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया है। नागरिक इस नंबर पर संपर्क कर अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
*मीडिया और जनता की भूमिका अहम*
प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। शीतल वर्मा ने कहा कि जनगणना जैसे बड़े अभियान को सफल बनाने में मीडिया और आम जनता का सहयोग जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे जनगणना में सक्रिय भागीदारी करें और सही व सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं।
*विकास की मजबूत नींव*
जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह देश के विकास की नींव है। इसके जरिए सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, वहां की जरूरतें क्या हैं और किस प्रकार की योजनाएं लागू की जानी चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं इसी डेटा के आधार पर तैयार की जाती हैं।
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