वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दिनों-दिन बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाएगी। परिसर की दीवारें जहां भी नीची हैं, उन्हें ऊंचा किया जाएगा। अभी 50 हजार वर्ग मीटर के इस परिसर की दीवारें आठ फीट तक हैं।उनके निचले हिस्से में पत्थर की दीवार है तो ऊपर ग्रिल व नेट लगाई गई हैं, लेकिन भगवान जौ विनायक मंदिर के पास, नीलकंठ व सतुआ बाबा आश्रम गली की ओर से दीवार नीची है। इससे बाहर से अंदर तक देखा या चढ़ कर आया जा सकता है। दीवार बढ़ाकर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की जाएगी।
इसके अलावा धाम से सटी और इस ओर आने वाली गलियों में हाई रिजाल्यूशन के एचडी कैमरे लगाए जाएंगे। परिसर के ब्लाइंड स्पाट भी कैमरे की नजर में होंगे। लगभग एक सप्ताह पिछले दिनों आईबी की अपर निदेशक विनीता शर्मा, एडीजी सुरक्षा तरुण गाबा ने परिसर का निरीक्षण कर वहां की वर्तमान सुरक्षा स्थिति का ऑडिट किया था।
बाद में मंदिर सुरक्षा समिति की बैठक में उन्होंने दीवार की ऊंचाई और कैमरे की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया। अब मंदिर प्रशासन ने कैमरे के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। जहां-कहीं दीवारें नीची हैं उस क्षेत्र का चिह्नांकन किया जा रहा है। अपर निदेशक आइबी एवं एडीजी सुरक्षा की चिंता सावन में होने आयोजन एवं विशेष व्रत त्योहारों पर जुटने वाली अपार भीड़ को लेकर भी है।
इस दृष्टि से सुरक्षा, यातायात, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की वर्तमान स्थिति और भविष्य की जरूरतों पर भी ध्यान दिया गया है। उड़पी व आसपास के दुकानदारों, ग्राहकों के साथ ही गंगा द्वार से दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की सुगम व व्यवस्थित वापसी के लिए गेट नंबर चार के निकट प्रशासनिक भवन के बगल से वैकल्पिक मार्ग का प्रस्ताव भी दिया गया है।
साथ ही भैरव गेट पर भीड़ के प्रभावी नियंत्रण व व्यवस्थित आवागमन के लिए आधुनिक स्लाइडिंग गेट स्थापित किया जाना है। गंगा द्वार व जलमार्ग सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए जल पुलिस, एनडीआरएफ व पीएसी की संयुक्त बोट पेट्रोलिंग को और प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है। साइबर सुरक्षा व सोशल मीडिया मानिटरिंग पर विशेष जोर देने का निर्देश है।
बैरिकेडिंग, होल्डिंग एरिया, वीडियो वाल (विशाल डिस्प्ले सिस्टम) और उद्घोषणा प्रणाली को और प्रभावी बनाने की भी योजना है। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के डिप्टी कलेक्टर शम्भू शरण ने बताया कि समस्त निर्देशों को ध्यान में रखते हुए आकलन किया जा रहा है। जल्द ही मूर्त रूप देने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
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