वाराणसी। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की फील्ड इकाई वाराणसी और झारखंड पुलिस ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए अंतर्राज्यीय बैंक डकैती गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना सहित तीन कुख्यात डकैतों को वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। इनके पास से झारखंड में हुई सनसनीखेज बैंक डकैती का करीब 1 किलो सोना और 20 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
*प्रमुख अधिकारियों के नेतृत्व में हुई कार्रवाई*
इस बड़ी घटना के अनावरण और अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था। इस ऑपरेशन का सफल नेतृत्व निम्नलिखित अधिकारियों द्वारा किया गया:
• निरीक्षक अमित श्रीवास्तव, एसटीएफ फील्ड इकाई वाराणसी।
• निरीक्षक अनिल कुमार सिंह, एसटीएफ फील्ड इकाई वाराणसी।
*वाराणसी के सारनाथ से हुई गिरफ्तारी*
एसटीएफ फील्ड इकाई वाराणसी को सूचना मिली थी कि झारखंड के हजारीबाग में हुई बैंक डकैती के अपराधी वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र में छिपे हुए हैं। सटीक सूचना के आधार पर 1 मई 2026 को सिंहपुर (थाना सारनाथ) के पास घेराबंदी कर तीन बदमाशों को दबोच लिया गया।
*गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण*
• मो० अफजल (सरगना): निवासी नवादा, बिहार।
• पंकज सिंह उर्फ रौनक सिंह: निवासी गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
• सौरभ यादव उर्फ सोनू: निवासी मऊ, उत्तर प्रदेश।
•
*हजारीबाग डकैती का पूरा मामला*
बीते 24 अप्रैल 2026 को हजारीबाग (झारखंड) के बरही स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में दिन-दहाड़े फिल्मी अंदाज में डकैती डाली गई थी। बदमाशों ने बैंक कर्मियों को असलहे के बल पर बंधक बनाया और लगभग 4 किलोग्राम सोना और नकदी लूटकर फरार हो गए थे। घटना के बाद हजारीबाग के बरही थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच करते हुए झारखंड पुलिस ने यूपी एसटीएफ से मदद मांगी, जिसके बाद वाराणसी इकाई ने इस गिरोह को ट्रैक करना शुरू किया।
*बरामदगी का विवरण*
गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से पुलिस ने लूट का माल बरामद किया है, जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है:
• सोना: 912.22 ग्राम शुद्ध स्वर्ण आभूषण।
• नकद: 20 लाख रुपये कैश।
• मोबाइल: 6 मोबाइल फोन।
• वाहन: घटना में प्रयुक्त स्कॉर्पियो गाड़ी (नंबर- BR-01HN-2024)।
•
*देशभर में फैला था लूट का नेटवर्क (क्रिमिनल हिस्ट्री)*
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका एक मजबूत संगठित गिरोह है, जो केवल बड़ी लूट की वारदातों को अंजाम देता है। इनके द्वारा कबूल की गई प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
• पश्चिम बंगाल (2013): दुर्गापुर में मुथुट फाइनेंस से 36 किलोग्राम सोना लूटा था।
• कोलकाता (2015): IIFL फाइनेंस कंपनी से 14 किलोग्राम सोना लूटा।
• कोलकाता (2021): मण्णापुरम गोल्ड फाइनेंस से 26 किलोग्राम सोना लूटा, हालांकि चेकिंग के डर से माल छोड़कर भाग गए थे।
• बिहार (2022): पटना के गर्दनी बाग में IIFL शाखा से 8 किलोग्राम सोना लूटा था।
• अन्य घटनाएं: रुड़की (उत्तराखंड) और गया (बिहार) में भी डकैती की वारदातों को अंजाम दिया।
•
*मोडस ऑपरेंडी: सोने पर रहती थी नजर*
एसटीएफ के अनुसार, यह गिरोह बैंक के नकद से ज्यादा लॉकर में रखे सोने के आभूषणों पर ध्यान केंद्रित करता था। वारदात से पहले ये लोग 1-2 महीने तक बैंक की रेकी करते थे। ये ऐसे बैंकों को चुनते थे जहां सुरक्षा कम हो और भागने के रास्ते आसान हों। लूट के सोने को बेचकर यह गिरोह प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट में पैसा इन्वेस्ट करता था।
फिलहाल, गिरफ्तार अभियुक्तों को वाराणसी के सारनाथ थाने में दाखिल कर दिया गया है और आगे की विधिक कार्यवाही झारखंड पुलिस द्वारा की जा रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है।
No comments:
Post a Comment