6/22/2026

*दालमंडी से निकला 40 से 48 घंटे लगातार चलने छठी मोहर्रम का आलम और दुलदुल का जुलूस गंगा जमुनी तहजीब और ऐतिहासिक अज़ादारी का सबसे बड़ा जुलूस है*


वाराणसी में छठी मोहर्रम का कदीमी जुलूस पूरे शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और ऐतिहासिक अज़ादारी का सबसे बड़ा प्रतीक है। यह जुलूस दालमंडी के कच्ची सराय (मोहल्ला सराय सिताबराय) स्थित वक्फ इमामबाड़े से उठता है, जिसे अंजुमन जव्वादिया (पितरकुंडा) और शहर की अन्य अंजुमनें संभालती हैं।इस ऐतिहासिक जुलूस की मुख्य विशेषताएं और कदीमी रास्ते निम्नलिखित हैं
: जुलूस की अवधि और विशेषता40 घंटे का सफर: यह बनारस का सबसे बड़ा और लंबा चलने वाला जुलूस है, जो करीब 40 से 48 घंटे लगातार चलता है।दशकों पुरानी परंपरा: इसमें पारंपरिक रूप से दुलदुल (इमाम हुसैन की सवारी की शबीह), ऊंट और घोड़े शामिल होते हैं। अकीदतमंद पूरे रास्ते दुलदुल को दूध और मलीदा पिलाकर मन्नतें मांगते हैं।

जुलूस का पारंपरिक मार्ग (कदीमी रास्ते)यह जुलूस दालमंडी (कच्ची सराय) से शुरू होकर शहर के लगभग 75% शिया बहुल इलाकों और 8 थाना क्षेत्रों से होकर गुजरता है:

कच्ची सराय से उठकर नई सड़क, नारियल बाजार, चौक और दालमंडी की गलियों से आगे बढ़ता है।दूसरा चरण: इसके बाद कालीमहाल, माताकुंड, लल्लापुरा और पितरकुंडा होते हुए यह दरगाह फातमान पहुंचता है।तीसरा चरण: दरगाह फातमान से यह चेतगंज, औसानगंज, जैतपुरा, दोषीपुरा, दारानगर, बहेलियाटोला, पठानीटोला और हनुमान फाटक की ओर मुड़ता है।अंतिम चरण: लाट भैरव (लाट सरैया), चौहट्टा लाल खां, मुकीमगंज, गायघाट, ठठेरी बाजार और पत्थर गलिया से गुजरते हुए तीसरे दिन वापस अपने मुख्य इमामबाड़े (कच्ची सराय) लौटकर समाप्त होता है।

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