6/05/2026

अंधरापुल क्षेत्र में मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मिसाल उस समय देखने को मिली, जब चार बेटों के होते हुए भी एक बुजुर्ग के निधन के बाद कोई नहीं किया उनका अंतिम संस्कार समाजसेवी अमन कबीर बने फरिश्ता:



वाराणसी। अंधरापुल क्षेत्र में मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मिसाल उस समय देखने को मिली, जब चार बेटों के होते हुए भी एक बुजुर्ग के निधन के बाद कोई उनका अंतिम संस्कार कराने नहीं पहुंचा। ऐसे कठिन समय में समाजसेवी अमन कबीर बेटी के लिए सहारा बनकर सामने आए और अंतिम संस्कार से लेकर आर्थिक सहायता तक हर जिम्मेदारी निभाई। जानकारी के अनुसार अंधरापुल निवासी रंजन जायसवाल का निधन हो गया था। निधन के करीब छह घंटे बाद तक उनके चारों बेटों में से कोई भी घर नहीं पहुंचा। पिता के शव के पास बैठी उनकी बेटी पूजा देवी बेसहारा होकर रो रही थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि वह अकेले अंतिम संस्कार का खर्च उठा सकें।

यूपी-112 के माध्यम से सूचना मिलने पर *समाजसेवी अमन कबीर* मौके पर पहुंचे। उन्होंने हालात को समझा और बिना देर किए मदद का हाथ बढ़ाया। अमन कबीर ने न केवल आर्थिक सहयोग किया, बल्कि अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था कर शव को *हरिश्चंद्र घाट* तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उठाई।

अमन कबीर के सहयोग से बेटी पूजा देवी ने हिम्मत जुटाई और अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया। हरिश्चंद्र घाट पर उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ अपने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार संपन्न कराया।

इस दौरान मौजूद लोगों ने समाजसेवी अमन कबीर की सराहना करते हुए कहा कि जब अपने ही साथ छोड़ दें, तब जो व्यक्ति मानवता के नाते आगे बढ़कर मदद करे, वही सच्चा समाजसेवी कहलाता है। अमन कबीर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि समाज सेवा केवल शब्द नहीं, बल्कि जरूरतमंद के साथ खड़े होने का नाम है।

यह घटना जहां *बेटी पूजा देवी* के साहस की मिसाल बनी, वहीं समाजसेवी *अमन कबीर की संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक सरोकार* को भी उजागर कर गई। वाराणसी में उनकी इस पहल की हर तरफ चर्चा हो रही है।

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