वाराणसी। ब्रिक्स इंडिया 2026 के दूसरे संस्कृति कार्य समूह (CWG) के तहत 11 सदस्य देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को वाराणसी स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल का दौरा किया। इस दौरान विदेशी मेहमानों ने भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा की समृद्ध विरासत को करीब से देखा और काशी के कारीगरों के अद्भुत कौशल की जमकर सराहना की।
प्रतिनिधिमंडल में ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, ईरान और दक्षिण अफ्रीका सहित ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि शामिल रहे। आगमन पर वस्त्र मंत्रालय एवं विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
दौरे के दौरान प्रतिनिधियों ने शिल्प संग्रहालय का भ्रमण कर भारत की विविध कला एवं शिल्प परंपराओं को जाना। वहीं इमर्सिव ज़ोन में वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पों पर आधारित विशेष ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति ने विदेशी मेहमानों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने शिल्प प्रदर्शन क्षेत्र में 20 कारीगरों द्वारा किए जा रहे सजीव प्रदर्शन को भी देखा। गुलाबी मीनाकारी, मूंज शिल्प, मुलायम पत्थर की जाली कला, वाराणसी के लकड़ी के लाख के बर्तन एवं खिलौने तथा निज़ामाबाद की प्रसिद्ध काली मिट्टी की कला समेत कई पारंपरिक शिल्पों की निर्माण प्रक्रिया का उन्होंने बारीकी से अवलोकन किया।
विदेशी प्रतिनिधियों ने कारीगरों से सीधे संवाद कर शिल्पों के इतिहास, तकनीक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी ली। उन्होंने भारतीय हस्तशिल्प की गुणवत्ता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक विरासत की खुलकर प्रशंसा की।
यह दौरा भारत की समृद्ध शिल्प परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। काशी की कला और शिल्प विरासत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग और विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है।
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