7/05/2026

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर प्रधानमंत्री का संदेश: राष्ट्र सेवा और एकता का संकल्प

नई दिल्ली, 6 जुलाई। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का व्यक्तित्व विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था, जो आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समृद्ध परिवार में जन्म लेने के बावजूद डॉ. मुखर्जी ने सुख-सुविधाओं का जीवन छोड़कर राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। व्यक्तिगत जीवन में अनेक कठिनाइयों और दुखों का सामना करने के बाद भी उन्होंने देशहित के अपने संकल्प को कभी कमजोर नहीं होने दिया।
उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के समय पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने और बाद में जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक संघर्ष किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 और 35(ए) का हटाया जाना उनके सपनों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम और उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के शिक्षा क्षेत्र में योगदान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में उन्होंने शिक्षा, शोध, छात्र कल्याण और खेलों को नई दिशा दी। उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी के लिए कर्मचारी तैयार करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम नेतृत्व तैयार करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंघ की स्थापना कर डॉ. मुखर्जी ने देश को एक वैचारिक विकल्प दिया, जो भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनसंघ का चुनाव चिन्ह 'दीपक' अंधकार को दूर करने और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक था।
प्रधानमंत्री ने भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही उन्होंने कुटीर उद्योग, हथकरघा और पारंपरिक कारीगरों के हितों की भी लगातार वकालत की।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिस सिंदरी उर्वरक संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसका पुनरुद्धार उनकी सरकार द्वारा कराया जाना उनके सार्वजनिक जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक रहा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना उचित समझा और जीवनभर राष्ट्रहित के लिए कार्य करते रहे।
उन्होंने बंगाल अकाल और मेदिनीपुर चक्रवात के दौरान डॉ. मुखर्जी की मानवीय सेवा को भी याद करते हुए कहा कि उन्होंने राहत कार्यों का नेतृत्व किया और पीड़ितों की सहायता के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया था।
प्रधानमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि देश का युवा वर्ग पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ एक सशक्त, आत्मनिर्भर, एकजुट और संवेदनशील भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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