वाराणसी।बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दाम और प्रदेश सरकार की नई वन टाइम टैक्स नीति के विरोध के बीच वाराणसी में टैक्सी किराए में बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। वाराणसी टूरिज्म संगठन ने विभिन्न श्रेणी की टैक्सी गाड़ियों के किराए में 2 रुपये प्रति किलोमीटर तक वृद्धि करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा आर्थिक हालात में टैक्सी संचालकों के लिए पुराने किराए पर संचालन करना संभव नहीं रह गया था।
वाराणसी टूरिज्म संगठन के अध्यक्ष प्रणय रंजन सिंह ने बताया कि टैक्सी संचालक लंबे समय से महंगाई की मार झेल रहे थे। उन्होंने कहा कि लगभग आठ वर्षों बाद किराए में संशोधन किया गया है। इससे पहले वर्ष 2018 में किराया बढ़ाया गया था, लेकिन उसके तुरंत बाद कोविड महामारी के कारण दो वर्षों तक टै्सियां लगभग बंद रहीं, जिससे संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यहां पर्यटन गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। बावजूद इसके टैक्सी संचालकों को राहत नहीं मिल सकी। संगठन के मुताबिक अयोध्या समेत प्रदेश के कई जिलों में पहले ही किराया बढ़ाया जा चुका है, इसलिए वाराणसी में भी यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।
*जानिए नया किराया*
*• स्विफ्ट डिजायर :* 11 रुपये से बढ़कर 13 रुपये प्रति किलोमीटर
*• अर्टिगा :* 14 रुपये से बढ़कर 16 रुपये प्रति किलोमीटर
*• इनोवा क्रिस्टा :* 18 रुपये से बढ़कर 20 रुपये प्रति किलोमीटर
*• टेंपो ट्रैवलर :* 28 रुपये से बढ़कर 30 रुपये प्रति किलोमीटर
*• अन्य बड़ी गाड़ियां :* 35 रुपये प्रति किलोमीटर तय
संगठन ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम रनिंग किलोमीटर की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह लोकल यात्रा के लिए प्रतिदिन 200 किलोमीटर और आउटस्टेशन यात्रा के लिए 250 किलोमीटर की बिलिंग लागू रहेगी।
*वन टाइम टैक्स नीति पर फूटा गुस्सा*
प्रणय रंजन सिंह ने प्रदेश सरकार की नई वन टाइम टैक्स नीति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ने नई और पुरानी सभी टैक्सी गाड़ियों पर एक साथ 15 वर्षों का रोड टैक्स जमा करने का आदेश जारी कर दिया है। इससे टैक्सी संचालकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 3 से 4 वर्ष पुरानी गाड़ियों पर भी तत्काल 1 से 2 लाख रुपये तक टैक्स जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। संगठन का कहना है कि एकमुश्त इतनी बड़ी रकम जमा करना अधिकांश टैक्सी मालिकों के लिए संभव नहीं है।
टूरिज्म संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस नीति पर जल्द पुनर्विचार नहीं किया तो पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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