5/10/2026

मातृ दिवस से ठीक पहले काशी से एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। आंखों में आंसू, कंधों पर मां का शव और कांपते हाथों से अपनी मां को मुखाग्नि देती एक बेटी



वाराणसी। मातृ दिवस से ठीक पहले काशी से एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। आंखों में आंसू, कंधों पर मां का शव और कांपते हाथों से अपनी मां को मुखाग्नि देती एक बेटी… यह दृश्य केवल दर्द का नहीं, बल्कि मां के प्रति उसके अथाह प्रेम, त्याग और समर्पण की मिसाल बन गया। बताया जा रहा है कि बेटी लंबे समय से अपनी बीमार मां की सेवा कर रही थी। आर्थिक तंगी के बावजूद उसने कभी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा। दूसरों के घरों में बर्तन मांजकर, झाड़ू-पोंछा कर वह अपनी मां की दवाइयों और इलाज का खर्च उठाती रही। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। बीती रात करीब 1:30 बजे उसकी मां ने अंतिम सांस ली। घर की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि लगभग आठ घंटे तक मां का पार्थिव शरीर घर में ही पड़ा रहा। बेटी असहाय होकर मदद की उम्मीद में दर-दर संपर्क करती रही।

इसी दौरान सूचना मिलने पर समाजसेवा के लिए पूरे काशी में पहचान रखने वाले, "बेसहारों का सहारा और अनाथों का नाथ" कहे जाने वाले अमन कबीर मदद के लिए आगे आए। काशी का कबीर कहे जाने वाले अमन कबीर ने तत्काल पहुंचकर अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था कराई और बेटी को इस कठिन घड़ी में सहारा दिया। आज जब कई लोग अपने माता-पिता को वृद्धाश्रमों में छोड़ देते हैं, वहीं इस बेटी ने अभावों और संघर्षों के बीच भी अपनी मां का साथ अंतिम सांस तक नहीं छोड़ा। मातृ दिवस के अवसर पर यह कहानी हर उस इंसान के लिए संदेश है, जो रिश्तों की अहमियत भूलता जा रहा है। इस बेटी के त्याग को शत-शत नमन।

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