वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वाँ दीक्षान्त महोत्सव गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत, संस्कृति और शैक्षणिक उत्कृष्टता का भव्य संगम देखने को मिला।
समारोह में कुल 11,959 विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए, जबकि 29 मेधावी विद्यार्थियों को 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 17 छात्र और 12 छात्राएँ शामिल रहीं। पीएचडी उपाधिधारियों, उत्कृष्ट अध्यापकों तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा, पाण्डुलिपियों का संरक्षण और आधुनिक तकनीक का समन्वय ही विकसित भारत-2047 की मजबूत आधारशिला बनेगा। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बताया तथा युवाओं से भारतीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि विज्ञान और भारतीय दर्शन एक-दूसरे के पूरक हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में संस्कारित, संवेदनशील और प्रज्ञावान मानव तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथि एवं प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विद्यार्थियों से माता-पिता और गुरुजनों के सम्मान को जीवन का आधार बनाने की अपील करते हुए कहा कि संस्कारयुक्त शिक्षा ही विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करेगी।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने इसे विश्वविद्यालय के इतिहास का गौरवपूर्ण दिवस बताते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा, 44वें दीक्षान्त समारोह और कुलाधिपति के सात वर्षों के सफल कार्यकाल का यह ऐतिहासिक संयोग भारतीय ज्ञान परम्परा के लिए प्रेरणादायी है।
समारोह में डिजिलॉकर के माध्यम से उपाधियाँ उपलब्ध कराई गईं। विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन, देशभक्ति गीत, लोकनृत्य तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। साथ ही सोनभद्र के आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए शिक्षण सामग्री, एचपीवी टीकाकरण जागरूकता सामग्री एवं विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें भी वितरित की गईं।
समापन:
राष्ट्रगान और शैक्षणिक शिष्टशोभा यात्रा के साथ 44वें दीक्षान्त महोत्सव का गरिमामय समापन हुआ।
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