7/29/2026

संत रविदास जी महाराज भेदभाव से रहित समतामूलक समाज के अग्रसर थे-योगी आदित्यनाथ*




*संत रविदास जी के 650 प्रकाश वर्ष पूर्व "ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न, छोट-बड़ो सब सम बसे, रविदास रहे प्रसन्न" के संदेश को प्रधानमंत्री ने पूरा किया पूरा-मुख्यमंत्री*

*वर्ष 2020 से 81 करोड़ लोगों को दिया जा रहा निःशुल्क राशन*

*सीएम योगी ने संत रविदास के सामाजिक समरसता व समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का लोगों से आह्वान किया* 

कहा कि, संत गुरु रविदास ने समरसता, समानता और मानवता का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है*

*भदोही जिले का नाम संत रविदास नगर ही रहेगा- सीएम योगी*

*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत शिरोमणि सद्गुरु संत श्री रविदास महाराज जी की 650वें प्रकाश वर्ष के पावन अवसर पर सीर गोवर्धनपुर स्थित उनके जन्म स्थली मंदिर में सिर नवाया और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की*

*केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंच से गुरु रविदास के भजन 'प्रभुजी तुम चंदन मैं पानी' को गाकर सुनाया*

*संत रविदास जी के विचारों को मानने वाले एक-एक व्यक्ति तक हम जाकर उनको जोड़ने का कार्य करेंगे- पंकज चौधरी* 

*पीएम मोदी ने संत रविदास के कहे वाक्य "ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न छोट-बड़ो सब सम बसे, रविदास रहे प्रसन्न" को अपने शासन में चरितार्थ किया-केशव प्रसाद मौर्य*

*संत रविदास ने समाज को जोड़ने के लिए अनेकों कार्य 650 साल पहले किया था-बृजेश पाठक*

*संत रविदास का पावन धाम, एकता समरसता बनी पहचान*

*जाति-पाति का भेद मिटाओ, संत रविदास का संदेश अपनाओ*

         वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे और संत शिरोमणि सद्गुरु संत श्री रविदास महाराज जी की 650वें प्रकाश वर्ष के पावन अवसर पर सीर गोवर्धनपुर स्थित उनके जन्म स्थली मंदिर में सिर नवाया और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। उसके बाद उन्होंने पास ही रविदास स्मारक में रविदास जी के विशाल कास्य प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।
       तत्पश्चात् मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास पार्क के पास मैदान में विशाल जनसभा में समरस संकल्प अभियान का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत् शुभारम्भ किया। जो एक राष्ट्रव्यापी सामाजिक संपर्क अभियान है। यह अभियान लगभग सात महीने तक चलेगा और इसका उद्देश्य संत रविदास के समता, सामाजिक सद्भाव और जाति-विहीन समाज के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना तथा सामाजिक समरसता और सद्भाव का संदेश देना है।
         मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौके पर मौजूद विशाल जन सभा में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए हर हर महादेव के उदघोष तथा संत शिरोमणि रविदास जी की जयकारा लगाई। उन्होंने लोगो से संत रविदास के सामाजिक समरसता व समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत गुरु रविदास ने समरसता, समानता और मानवता का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके विचार सामाजिक भेदभाव को समाप्त कर राष्ट्र निर्माण की दिशा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है, ताकि समाज में सद्भाव और एकता और मजबूत हो सके।
         मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संत रविदास जी ने संत रामानंद के अभियान अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का कल्याण को चरितार्थ किया। उन्होंने कहा भारतीय जनता पार्टी की सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण करके विकसित भारत के अभियान को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने मां गंगा के प्रति अपनी असीम भक्ति प्रदर्शित करते हुए 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' को उल्लेखित किया। संत रविदास जी महाराज भेदभाव से रहित समतामूलक समाज के अग्रसर थी। उन्होंने कहा संत रविदास जी कहते थे "ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न, छोट-बड़ो सब सम बसे, रविदास रहे प्रसन्न" को प्रधानमंत्री ने पूरा करने का कार्य अन्न योजना से किया। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना बिना जात पात देखे वर्ष 2020 से निरंतर 81 करोड़ लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों विशेष रूप से समाजवादी पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि सपा सरकार ने कन्नौज मेडिकल कॉलेज का नाम बाबा अंबेडकर के नाम से बदल दिया था, जिसको हमने पुनः बाबा अम्बेडकर के नाम पर किया। उन्होंने औरैया मेडिकल कॉलेज का नाम माता अहिल्याबाई के नाम पर किया गया। उन्होंने कहा भदोही जिले का नाम संत रविदास नगर के नाम पर ही रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जालंधर एयरपोर्ट का नामकरण संत रविदास जी के नाम पर और अयोध्या अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम संत बाल्मीकि के नाम पर किया गया है। उन्होंने कहा निर्माण श्रमिकों के उत्थान हेतु सरकार ने कई व्यवस्थाएं की हैं, जिसमें उनके बच्चों की पढ़ाई हेतु 18 मंडलों पर अटल आवासीय विद्यालय बनाए गए हैं, जिसमें वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा की सरकार प्रदेश में सभी जिलों में बाबा अम्बेडकर के नाम पर मुख्यमंत्री कम्पोजिट विद्यालय बनाने का कार्य करेगी। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में समतामूलक समाज की स्थापना हेतु सभी परम्पराओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। एक समरस समाज बने, इसी विश्वास के साथ गुरु रविदास जी के 650 वीं जन्मशती समारोह पर इतने बड़े आयोजन के लिए सभी को शुभकामनाएं दीं। 
       केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी संत रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए सभी को इनके बताए जीवन पर चलने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर के संविधान सभा में समानता और भाईचारा का संदेश को बताते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि मैंने संत रविदास जी के जीवन से उन्होंने दोनों को लिया था। उन्होंने गुरु रविदास के भजन 'प्रभुजी तुम चंदन मैं पानी' को भी गाकर सभी को सुनाया।
       केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने उपस्थित समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि समरसता संकल्प अभियान में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया तथा कहा कि इतनी बड़ी पार्टी का कार्यकर्ता होने पर मैं अपने को गौरवान्वित महसूस करता हूं। इस अभियान से हम सरकार द्वारा किए गए कार्यों से सभी को जोड़ने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की प्रतिमा के सामने दीपोत्सव के साथ उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य सभी कार्यकर्ता करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सभी विधानसभा में संत रविदास समेत सभी विभूतियों के मूर्तियों को बचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी ने कहा था संत रविदास जी ने समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को उच्च स्तर पर लाने का कार्य किया था। संत रविदास जी के विचारों को मानने वाले एक-एक व्यक्ति तक हम जाकर उनको जोड़ने का कार्य करेंगे। संत रविदास जी की पावन माटी पूरे देश में सभी बूथों तक जाएगी। 
        प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कार्यक्रम में उपस्थित समुदाय को संबोधित करते हुए संत रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए धन्यवाद भी दिया। यह जन्मभूमि संत रविदास जी की पावन भूमि है तथा प्रधानमंत्री जी का कार्यक्षेत्र भी है। यह समरसता का आयोजन पुण्य संत शिरोमणि रविदास जी के आदर्शों पर चलने को हमें प्रेरित करता है। उन्होंने कहा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रविदास के कहे वाक्य "ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न छोट-बड़ो सब सम बसे, रविदास रहे प्रसन्न" को अपने शासन में चरितार्थ किया है। उन्होंने सपा सरकार में संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही करने को भी आड़े हाथों लिया। विपक्ष के लोग संतों का अपमान करते हैं। अंत में उन्होंने सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाइयां भी दीं। उन्होंने संत रविदास के दोहे 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' को भी उद्घोषित किया। 
        उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संत रविदास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके रचित अनेकों दोहों को भी सुनाया। उन्होंने कहा कि यह विशाल आयोजन देश में समरसता का संदेश देने में सफल होगा। इतनी भारी संख्या में आने के उन्होंने सभी को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने समाज को जोड़ने के लिए अनेकों कार्य 650 साल पहले किया था। उन्होंने सभी को गुरु पूर्णिमा की बधाई भी दी।
        राज्य सभा सदस्य तरुण चुंग ने कहा कि आज संत रविदास जी की पवित्र नगरी के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों से दो ट्रेनों का संचालन पंजाब से किया जा रहा है। उन्होंने बताया देश के दो प्रमुख एयरपोर्ट का नाम महान विभूतियों के नाम पर रखा गया है, जिसमें अयोध्या एयरपोर्ट का नाम बाल्मीकि जी तथा आदमपुर एयरपोर्ट का नाम संत शिरोमणि रविदास जी के नाम पर रखा गया। उन्होंने कहा कि संत रविदास के संदेश कोई गरीब भूखा नहीं सोये, उसी को प्रधानमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री अन्न योजना के द्वारा बढ़ाते हुए 80 करोड़ लोगों को लाभांवित किया जा रहा, ताकि कोई भी गरीब भूखा नहीं सोने पाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति भी अपने बहुमूल्य समय से समय निकालने पर कृतज्ञता व्यक्त की।
      भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम ने सीर गोवर्धनपुर में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज के 650वें समरसता संकल्प अभियान के शुभारंभ अवसर पर अपने संबोधन में मुख्य रूप से कहा कि संत गुरु रविदास जी ने समरसता, समानता और सामाजिक न्याय का जो संदेश दिया, वही भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। कहा कि यह अभियान 29 जुलाई 2026 से 20 फरवरी 2027 तक पूरे देश में चलेगा और संत रविदास के विचारों को गांव-गांव तथा समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य करेगा कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने संत रविदास जी से जुड़े तीर्थस्थलों के विकास, उनके सम्मान और विरासत के संरक्षण के लिए अनेक ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान, अवसर और भागीदारी पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है तथा संत रविदास के "समरस समाज" के आदर्श को जन-जन तक ले जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अभियान के माध्यम से जातिगत भेदभाव मिटाने, सामाजिक सद्भाव बढ़ाने और संत रविदास के विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत कलश यात्रा, समरसता संगोष्ठी, संत संपर्क, दीपोत्सव, समरसता यात्रा और युवा संवाद जैसे कार्यक्रम पूरे देश में आयोजित किए जाएंगे।
         कार्यक्रम के संयोजक एवं भाजपा अनुसूचित मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने विषय प्रस्तावना रखते हुए बताया कि अभियान के 5 महत्वपूर्ण चरण है। जिसमें 29 जुलाई 2026-10 सितंबर 2026 तक। “श्री गुरु रविदास महाराज कलश वंदन अभियान”- राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला, और मंडल स्तर तक 29 जुलाई 2026 से 31 अगस्त 2026। “संत संपर्क अभियान” 5 अक्टूबर 2026 से 5 नवंबर 2026। “श्री गुरु रविदास महाराज समरसता यात्रा” (जालंधर से काशी तक) राज्य-जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली,        मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश। 26 नवंबर- ल15 जनवरी 2027। “श्री गुरु रविदास महाराज छात्रावास संपर्क अभियान चलेगा।
       कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के संयोजक व अनुसूचित मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने व धन्यवाद ज्ञापन समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने किया।
         कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने संत निरंजन दास को भी सम्मानित किया। 
         मंच पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के साथ डेरा सच्चा पंथ के प्रमुख संत निरंजन दास महाराज, जगदगुरू नरेंद्रानंद जी महाराज, प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री द्वय केशव प्रसाद मोर्य, ब्रजेश पाठक, राष्ट्रीय महामंत्री द्वय दुष्यंत गौतम व तरुण चुग, अनुसूचित मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, उत्तराखंड के मंत्री खजान दास जी, दिल्ली सरकार के मंत्री रविन्द्र जी, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री गण दयाशंकर मिश्र दयालु , असीम अरुण, हंसराज विश्वकर्मा, संजीव गोंड़, रविंद्र जायसवाल, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया सहित पूज्य संतगण मंचासिंन रहे। 
        जनसभा में पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, विधायक टी राम, विधायक डॉ अवधेश सिंह, विधायक सुनील पटेल, प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल, प्रदेश महामंत्री रामप्रकाश सिंह, त्रयंम्बक त्रिपाठी, अनिल यादव, जिलाध्यक्ष राम सकल पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, 
पूर्व विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित मोर्चा अशोक रावत, राकेश शर्मा,राकेश शर्मा, सुदामा पटेल, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी नवरतन राठी, सह मीडिया प्रभारी संतोष सोलापुरकर,अजीत रावत, नवीन कपूर, जगदीश त्रिपाठी, अशोक पटेल, संजय सोनकर, सुरेंद्र पटेल, प्रवीण सिंह गौतम, इंजीनियर अशोक यादव, एडवोकेट अशोक जाटव, जेपी दूबे, डॉ गीता शास्त्री, किशोर सेठ, प्रमील पांडेय, शैलेंद्र मिश्रा सोनू, डॉ अनुपम गुप्ता, डॉ रचना अग्रवाल, अरविंद पटेल, सिद्धार्थ कुशवाहा, किशन कन्नौजिया सहित हजारों लोग मौजूद रहे।

विश्वविख्यात अघोरपीठ में गुरुपर्व पर अघोराचार्य का आव्हान

अपने अंदर से अवगुणों को निकालना ही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी - बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी
 विश्वविख्यात अघोरपीठ में गुरुपर्व पर अघोराचार्य का आव्हान

गुरु पूर्ण माँ यानि गुरुपूर्णिमा । माँ के रूप में उपस्थित गुरु के प्रति शिष्य की अगाध, आस्था और समर्पण का ये पावन पर्व यूँ तो देश के कोने-कोने में मनाया जाता है, लेकिन आध्यात्मिक नगरी काशी में इस पर्व का नज़ारा अदभुत होता है । गुरु के दर्शन को लालायित भक्त समुदाय से काशी के मठ, आश्रम पटे पड़े रहते हैं । पुरातन संस्कृति की झलक जीवंत होती है । ग़ज़ब का आकर्षण होता है । बेमिसाल ।
ख़ास तौर पर दृश्य जब अघोर के विश्वविख्यात सिद्धपीठ, 'बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड', का हो तो छटा निराली ही दिखती है । 29 जुलाई को गुरु पर्व के दिन पूरी दुनिया में अघोर परंपरा के आराध्य-ईष्ट और इस सिद्धपीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर , अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी, का दर्शन करने के लिए देश-विदेश से हज़ारों श्रद्धालुओं का आगमन 27 जुलाई की रात से ही शुरु हो गया था , जो 28 जुलाई की देर रात तक जारी रहा । 29 जुलाई को गुरुपूर्णिमा पर्व पर सुबह 4 बजे से ही हज़ारों श्रद्धालू कतारबद्ध होकर अपने गुरु दर्शन का इंतज़ार करने लगे । और जैसे ही अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी अपने कक्ष से बाहर आए, तो , गुरु दर्शन को आतुर भक्तजनों के 'हर हर महादेव' के गगनभेदी उदघोष से पूरा सिद्धपीठ गूँज उठा । और इसके बाद जैसे ही अघोराचार्य अपने विश्वविख्यात औघड़ तख़्त पर विराजमान हुए, भक्तों के बीच उनकी एक झलक पाने की होड़ लग गई । लेकिन बेहद अनुशासित पंक्तिबद्ध भक्तों ने संयमित तरीके से अपने शिव-स्वरुप गुरु अघोराचार्य का दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ किया । दर्शन पूजन का ये सिलसिला देर शाम तक जारी रहा । बाद में भजन-संध्या के तहत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखा , जिसमें नामचीन कलाकारों ने अपने फ़न का जादू बिखेरा और भावविभोर भक्तजनों की वाहवाही लूटी । इसके बाद एक वैचारिक गोष्ठी भी आयोजित हुई, जिसमें तमाम विद्ववत जनों ने गुरु पर्व की महिमा का उल्लेख किया । कार्यक्रम के अंत में भक्तजनों को दिए गए अपने आशीर्वचन में अघोराचार्य ने राष्ट्रीय -अंतराष्ट्रीय विषम परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त किया । गुरु-शिष्य परम्परा के इस पावन पर्व पर भक्तजनों के धैर्य और समर्पण की सराहना करते हुए बाबा गौतम राम जी ने भक्तों से आग्रह किया कि *"आप अपने अवगुणों को छोड़कर गुरु के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा अर्पित कर सकते हैं"* ।
उधर भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए आला प्रशासनिक अधिकारी लगातार आश्रम परिसर पर नज़र रखे हुए थे और सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम थे ।
आश्रम परिसर के बाहर मेले जैसा माहौल दिखा, और, भक्तजन दर्शन पूजन के बाद मेले का लुत्फ़ उठाते दिखे ।

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वाँ दीक्षान्त महोत्सव गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।

वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वाँ दीक्षान्त महोत्सव गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत, संस्कृति और शैक्षणिक उत्कृष्टता का भव्य संगम देखने को मिला।

समारोह में कुल 11,959 विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए, जबकि 29 मेधावी विद्यार्थियों को 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 17 छात्र और 12 छात्राएँ शामिल रहीं। पीएचडी उपाधिधारियों, उत्कृष्ट अध्यापकों तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा, पाण्डुलिपियों का संरक्षण और आधुनिक तकनीक का समन्वय ही विकसित भारत-2047 की मजबूत आधारशिला बनेगा। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बताया तथा युवाओं से भारतीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि विज्ञान और भारतीय दर्शन एक-दूसरे के पूरक हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में संस्कारित, संवेदनशील और प्रज्ञावान मानव तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथि एवं प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विद्यार्थियों से माता-पिता और गुरुजनों के सम्मान को जीवन का आधार बनाने की अपील करते हुए कहा कि संस्कारयुक्त शिक्षा ही विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करेगी।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने इसे विश्वविद्यालय के इतिहास का गौरवपूर्ण दिवस बताते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा, 44वें दीक्षान्त समारोह और कुलाधिपति के सात वर्षों के सफल कार्यकाल का यह ऐतिहासिक संयोग भारतीय ज्ञान परम्परा के लिए प्रेरणादायी है।
समारोह में डिजिलॉकर के माध्यम से उपाधियाँ उपलब्ध कराई गईं। विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन, देशभक्ति गीत, लोकनृत्य तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। साथ ही सोनभद्र के आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए शिक्षण सामग्री, एचपीवी टीकाकरण जागरूकता सामग्री एवं विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें भी वितरित की गईं।
समापन:
राष्ट्रगान और शैक्षणिक शिष्टशोभा यात्रा के साथ 44वें दीक्षान्त महोत्सव का गरिमामय समापन हुआ।

सारनाथ में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, बौद्ध भिक्षुओं और विद्वानों ने की सहभागिता


सारनाथ को मिली वैश्विक पहचान, धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस पर गूंजा बुद्ध का संदेश

धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस पर जुटे देश-विदेश के बौद्ध विद्वान, सारनाथ बना वैश्विक संवाद का केंद्र*

सारनाथ आने वाले समय में दुनिया के प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थलों में होगा शामिल : जयवीर सिंह*

*लखनऊ/वाराणसी, 29 जुलाई 2026:*

वाराणसी के सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार में आषाढ़ पूर्णिमा एवं धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस के पावन अवसर पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ भव्य रूप से संपन्न हुआ। "धम्मचक्क पवत्तन दिवस का महत्व" विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं, विद्वानों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित बौद्ध भिक्षुओं का सम्मान करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सारनाथ को वैश्विक बौद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। 

*धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस पर जुटे देश-विदेश के बौद्ध विद्वान*
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग) तथा महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, सारनाथ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय संगोष्ठी में धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, सारनाथ के अध्यक्ष वेन. आर. सुमित्थानंद थेरो सहित अनेक बौद्ध भिक्षु और विद्वान उपस्थित रहे। संगोष्ठी का उद्देश्य भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश और उनके धम्म संदेश को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाना है।

*सारनाथ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर होगा स्थापित* 
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सारनाथ के पर्यटन विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म से जुड़े इस पवित्र स्थल की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि सारनाथ आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिससे यहां पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिल सके।

*यूनेस्को की सूची में शामिल होने से बढ़ी सारनाथ की वैश्विक पहचान*
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि सारनाथ अब भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। लगभग 28 वर्षों बाद मिली इस महत्वपूर्ण मान्यता ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत को नई पहचान दी है। अब तक प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध धरोहर स्थलों में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे स्थल शामिल थे, जो आगरा क्षेत्र तक सीमित थे। सारनाथ के शामिल होने से उत्तर प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान अब पूर्वांचल तक विस्तृत हो गई है, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

*बौद्ध विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान*
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि सारनाथ की वैश्विक पहचान मजबूत होने से उत्तर प्रदेश के पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ख्याति मिलेगी। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश की समृद्ध बौद्ध विरासत को विश्व स्तर पर स्थापित करेगी, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के नए अवसर भी सृजित करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सारनाथ आने वाले समय में दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा तथा भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

*महापंडित राहुल सांकृत्यायन के धम्मपद अनुवाद का हुआ लोकार्पण*
कार्यक्रम में महापंडित राहुल सांकृत्यायन द्वारा मूल पाली से संस्कृत में अनूदित धम्मपद तथा प्रो. सिद्धार्थ सिंह द्वारा लिखित पुस्तक "युगपुरुष कोसेत्सु नोसु को स्मरण करते हुए" का लोकार्पण किया गया। संगोष्ठी की रूपरेखा प्रो. विमलेंद्र कुमार ने प्रस्तुत की। इस दौरान अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के निदेशक डॉ. राकेश सिंह, संस्थान के सदस्य वेन. के. सिरी सुमेधा थेरो, महाबोधि विद्या परिषद, सारनाथ के अध्यक्ष एवं दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के पूर्व कुलपति प्रो. आर. एम. पाठक, एबीएसएस लखनऊ के सदस्य तरुणेश बौद्ध, कोलकाता विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग के प्रो. उज्ज्वल कुमार तथा नवनालंदा महाविहार, नालंदा के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए। 

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संगोष्ठी के दूसरे दिन (30 जुलाई) आयोजित तीन तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के विद्वान, शोधकर्ता और बौद्ध भिक्षु धम्मचक्क पवत्तन दिवस के महत्व तथा बौद्ध दर्शन के विभिन्न आयामों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. अवधेश कुमार चौबे, द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रो. उज्ज्वल कुमार तथा तृतीय सत्र की अध्यक्षता प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा करेंगी। इन सत्रों में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, नवनालंदा महाविहार, केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान (सीआईएचटीएस), महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, सारनाथ सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वान अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। प्रत्येक तकनीकी सत्र के अंत में अध्यक्ष द्वारा चर्चा एवं समापन टिप्पणी दी जाएगी। कार्यक्रम के अंत में डॉ. राकेश सिंह सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करेंगे।

7/24/2026

28 जुलाई 2026को आयोजित होगी जनसुनवाई

वाराणसी।उ0प्र0 राज्य महिला आयोग, लखनऊ की मा० अध्यक्ष (राज्यमन्त्री स्तर प्राप्त) डॉ बबीता सिंह चौहान अध्यक्षता में घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना,जमीनी विवाद और महिला उत्पीड़न की घटनाओं की रोकथाम एवं पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाए जाने हेतु जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन 28 जुलाई को पूर्वाह्न 11 बजे से सर्किट हाउस सभागार में किया जाएगा। जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्र ने जनपद की समस्त महिलाओं से अपील किया है कि उक्त जनसुनवाई में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी समस्याएं प्रस्तुत करें।