5/16/2026

वट वृक्ष को त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का प्रतीक माना जाता है,जिसके नीचे महिलाओं ने सामूहिक रूप से व्रत की कथा सुनी और परिक्रमा की

https://youtu.be/FLSStGKqe7g

 वाराणसी। वट सावित्री व्रत और ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर शनिवार को सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ पूजा-अर्चना की। इस वर्ष वट सावित्री व्रत के साथ शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बना, जिससे पर्व का महत्व बढ़ गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह शुभ योग कई वर्षों बाद आया है।

दशाश्वमेध थाना क्षेत्र स्थित मीरघाट के धर्मकूप मुहल्ले में स्थित काशी खंडोक्त कंचन वट वृक्ष और माता सावित्री देवी जी के संयुक्त मन्दिर में सुबह से ही  महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर व्रत रखा और विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा की। पूजा के दौरान उन्होंने वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत और मौली लपेटते हुए परिक्रमा की और वट सावित्री व्रत कथा सुनी।


इस बाबत काशी तीर्थ पुरोहित सभा के अध्यक्ष व वट सावित्री माता मंदिर के प्रधान पुरोहित पं कन्हैया लाल त्रिपाठी ने बताया* कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, मध्य भाग में भगवान विष्णु और शीर्ष पर भगवान शिव का वास होता है।

श्री त्रिपाठी ने आगे कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार, माता सावित्री ने इसी वट वृक्ष के नीचे तप और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह व्रत वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाता है और परिवार में समृद्धि लाता है।उन्होनें बताया* कि इस वर्ष अमावस्या पर कई शुभ योग बनने के कारण दान-पुण्य, पूजा और शनि उपासना का भी विशेष महत्व है।


https://youtu.be/FLSStGKqe7g

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